✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
ईपीएफ, ईएसआई, अंतरवेतन और सातवां वेतन लागू करने सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारी आंदोलन पर अड़े
- नगर पालिका कर्मचारियों ने 7 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल का किया एलान
- कर्मचारी नेताओं ने प्रशासन पर समझौते के बावजूद मांगें नहीं मानने का लगाया आरोप
- ईपीएफ, ईएसआई और सातवां वेतन के भुगतान में लापरवाही का आरोप
- कार्यपालक पदाधिकारी पर कर्मचारियों से दुर्व्यवहार और शोषण के गंभीर आरोप
सिवान: नगर पालिका कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर 7 मई 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का एलान किया है। बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (एक्टू) के राज्य सचिव अमित कुमार ने नगर पालिका प्रशासन पर कर्मचारियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी करने और पूर्व में हुए समझौते को लागू नहीं करने का आरोप लगाया है।
अमित कुमार ने बताया कि 5 फरवरी 2026 को कर्मचारियों की मांगों को लेकर एक यूनियन और नगर पालिका प्रशासन के बीच जिलाधिकारी की मध्यस्थता में समझौता हुआ था। उस समय तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी विपिन कुमार, सिटी मैनेजर ओम प्रकाश और उज्जवल तिवारी की मौजूदगी में कई मांगों पर सहमति बनी थी। कर्मचारियों को भरोसा दिया गया था कि लंबित भुगतान और अन्य समस्याओं का समाधान शीघ्र किया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के तीन महीने बीत जाने के बावजूद आज तक किसी भी मांग को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। इस संबंध में 16 अप्रैल 2026 को कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद सिवान को पत्र लिखकर समझौते के बिंदुओं को लागू करने की मांग की गई थी। पत्र में यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई।
अमित कुमार ने बताया कि 5 मई 2026 को एक बार फिर मांग पत्र सौंपकर प्रशासन को कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन तब भी कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि मजबूर होकर कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है और इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी।
उन्होंने बातचीत में कहा कि नगर पालिका प्रशासन द्वारा सफाई कर्मचारियों और छोटे कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। कर्मचारियों का ईपीएफ और ईएसआई का करोड़ों रुपये बकाया है। अमित कुमार के अनुसार वर्ष 2018 से अब तक कर्मचारियों का करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये ईपीएफ मद में बकाया है। उन्होंने कहा कि 5 फरवरी को दावा किया गया था कि 90 लाख रुपये कर्मचारियों के खातों में भेजे गए हैं, लेकिन आज तक किसी कर्मचारी के खाते में राशि नहीं पहुंची।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों के वेतन से ईएसआई मद में पैसा काटा गया, लेकिन वर्ष 2023 से अब तक संबंधित खाते में जमा नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों को इलाज और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि ईएसआई मजदूरों की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन इस मामले में गंभीर नहीं है।
कर्मचारी नेताओं ने सातवां वेतन, अंतरवेतन, सर्विस बुक खोलने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। अमित कुमार ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2022 में सर्विस बुक खोलने का आदेश दिया था, लेकिन आज तक कई कर्मचारियों की सर्विस बुक नहीं खुल सकी है। सातवें वेतन का सत्यापन और उसका भुगतान भी लंबित है।
उन्होंने वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी नीलम श्वेता पर भी गंभीर आरोप लगाए। अमित कुमार ने दावा किया कि कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपमानित किया गया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं पर बातचीत करने के बजाय उन्हें दबाने और डराने का प्रयास किया जा रहा है।
अमित कुमार के अनुसार, जब कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर कार्यपालक पदाधिकारी से वार्ता करनी चाही तो उन्हें कहा गया कि “इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है, जाकर सीधे डीएम साहब से बात कीजिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कर्मचारियों की 11 सूत्री मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 7 मई से नगर पालिका के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरान शहर की सफाई व्यवस्था, जल निकासी और अन्य सेवाएं प्रभावित होती हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी।

