✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
“बेकसूर को फंसाने की साजिश, निष्पक्ष जांच हो” – अरुण कुमार गुप्ता का बड़ा बयान
- ओसामा शहाब के घर छापेमारी पर राजद की तीखी प्रतिक्रिया
- अरुण कुमार गुप्ता ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
- निष्पक्ष जांच की मांग, एकतरफा कार्रवाई का आरोप
- “लोकप्रिय विधायक को परेशान किया जा रहा” – राजद
सीवान में पूर्व सांसद दिवंगत मो.शहाबुद्दीन के बेटे और रघुनाथपुर से राजद विधायक ओसामा शहाब के घर हुई हाई-प्रोफाइल पुलिस छापेमारी के बाद अब सियासत गरमा गई है। जहां एक ओर प्रशासन इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं ने इस पर कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राजद नेता अरुण कुमार गुप्ता का बयान सामने आया है, जिसने पूरे मामले को नया राजनीतिक रंग दे दिया है।
राजद नेता अरुण कुमार गुप्ता ने छापेमारी की कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई एकतरफा है और बिना निष्पक्ष जांच के की जा रही है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन सरकार के इशारे पर काम कर रहा है और एक बेकसूर व्यक्ति को फंसाने की साजिश रची जा रही है।
उन्होंने अपने बयान में कहा, “हम इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं। सरकार बिना जांच, बिना सोचे-समझे एकतरफा कदम उठा रही है। इस तरह का रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। कम से कम मामले की निष्पक्ष जांच तो होनी चाहिए, लेकिन यहां पहले से ही किसी को दोषी मानकर कार्रवाई की जा रही है।”
उन्होंने सरकार की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि मौजूदा सरकार की मंशा साफ नहीं है और प्रशासन पूरी तरह से सरकार के दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हो सकती है।
उन्होंने आगे कहा, “सरकार की नीयत ठीक नहीं लग रही है। प्रशासन उनके इशारे पर काम कर रहा है। एक बेकसूर को फंसाने की साजिश हो रही है। हमारे विधायक को परेशान किया जा रहा है। हमारे लोकप्रिय विधायक को टारगेट किया जा रहा है।”
गौरतलब है कि सोमवार की सुबह सिवान में ओसामा शहाब के घर पर पुलिस ने छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में सारण प्रक्षेत्र के डीआईजी निलेश कुमार, एसपी पूरन कुमार झा समेत कई थानों की पुलिस टीम शामिल थी। यह छापेमारी महादेवा ओपी थाना में दर्ज एक मामले के तहत की गई, जिसमें एक डॉक्टर की जमीन पर जबरन कब्जा और रंगदारी के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस का दावा है कि इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं और कोर्ट से वारंट लेने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है। हालांकि, छापेमारी के दौरान ओसामा शहाब मौके पर नहीं मिले, जिसके बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है।
इसी बीच, राजद नेताओं के इस तरह के बयान ने पूरे मामले को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ प्रशासन कानून के तहत कार्रवाई का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक उत्पीड़न बता रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला अब सिर्फ कानूनी दायरे में सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। खासकर तब, जब इसमें एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार और सत्ताधारी व्यवस्था के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही हो।
स्थानीय स्तर पर भी इस बयान का असर साफ नजर आ रहा है। राजद समर्थकों के बीच नाराजगी बढ़ रही है और वे इसे अपने नेता के खिलाफ साजिश के रूप में देख रहे हैं। वहीं, आम जनता के बीच भी इस पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
फिलहाल, यह पूरा मामला दो समानांतर धाराओं में आगे बढ़ता नजर आ रहा है—एक तरफ कानूनी जांच और पुलिस कार्रवाई, तो दूसरी तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सच्चाई किस दिशा में सामने आती है और इस पूरे घटनाक्रम का अंतिम निष्कर्ष क्या होता है।


