✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
दरौली में पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
- पार्किंग विवाद के बाद छात्रा के साथ मारपीट का आरोप
- छत से धक्का देने से छात्रा गंभीर रूप से घायल, आईसीयू में भर्ती
- थाना प्रभारी को लाइन हाजिर, जांच के लिए कमेटी गठित
- परिजनों का आरोप—मामले को दबाने की कोशिश
दरौली थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। गाड़ी पार्किंग विवाद में तत्कालीन थानाध्यक्ष अविनाश कुमार झा ने एक इंटरमीडिएट की छात्रा के साथ न केवल बेरहमी से मारपीट की, बल्कि उसे छत से धक्का देकर नीचे फेंक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना दरौली थाना क्षेत्र के टिकुलिया गांव की है, जहां दो अप्रैल को दो पड़ोसियों के बीच बाइक पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था। दोनों पक्षों ने मामला दर्ज कराया था और बाद में न्यायालय से जमानत भी ले ली थी। लेकिन पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विपक्षी के प्रभाव और पैसों के बल पर पुलिस ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। घर में घुसकर माता-पिता के बारे में पूछताछ करने लगे।
घायल छात्रा की पहचान विजय गोंड की 18 वर्षीय पुत्री रीमा कुमारी गोंड के रूप में हुई है। जो शहर के निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। रीमा ने बताया कि दस अप्रैल को जब उसके माता-पिता घर पर नहीं थे, तभी दरौली थाना प्रभारी एक महिला सिपाही के साथ उसके घर पहुंचे। बिना अनुमति घर में घुसकर वे सीधे छत पर पहुंच गए और उसके माता-पिता के बारे में पूछताछ करने लगे। जब रीमा ने उन्हें बुलाने की बात कही, तो पुलिसकर्मियों ने उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर महिला सिपाही ने उसके बाल पकड़कर थप्पड़ मारा और लाठी से पिटाई की गई।
इसके बाद थाना प्रभारी और महिला सिपाही ने जान से मारने की नीयत से उसे छत से धक्का दे दिया। नीचे गिरने से रीमा के दोनों पैर और एक हाथ बुरी तरह टूट गए। घटना के बाद पुलिसकर्मी मौके से फरार हो गए, जो उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। स्जवनों और स्थानीय लोगों की मदद से रीमा को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र, फिर सदर अस्पताल और अंततः एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।
डाक्टरों के अनुसार, रीमा के एक पैर का घुटना पूरी तरह टूट गया है और हाथ की कलाई में गंभीर फ्रैक्चर था, जिसमें आपरेशन कर राड लगाया गया है। फिलहाल वह आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। घटना के बाद स्जवनों का आरोप है कि थाना प्रभारी सादे कपड़ों में अस्पताल पहुंचे और मामले को दबाने की कोशिश की। इस पूरे प्रकरण ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने बताया कि पीड़ित पक्ष के आवेदन पर थाना प्रभारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच के लिए त्रिस्तरीय कमेटी गठित की गई है। साथ ही अविनाश कुमार झा को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

