✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
अभिभावकों को राहत, एकाधिकार पर लगेगी रोक
- एक ही दुकान से किताब-ड्रेस खरीदने की बाध्यता खत्म
- 15 अप्रैल तक वेबसाइट पर सूची जारी करना अनिवार्य
- यूनिफॉर्म में 3 साल तक बदलाव नहीं होगा
- आदेश उल्लंघन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
सिवान: जिले में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से अत्यधिक शुल्क वसूली और मनमानी पर अब सख्ती शुरू हो गई है। जिलाधिकारी सह जिला दंडाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने निजी स्कूल संचालकों के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए एकाधिकार प्रवृत्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
जिलाधिकारी को प्राप्त शिकायतों, समाचार पत्रों और सामाजिक संगठनों की रिपोर्ट के आधार पर यह सामने आया था कि कई निजी विद्यालय अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही किताबें, यूनिफॉर्म, बैग, जूते और कॉपियां खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इन वस्तुओं की कीमत भी बाजार से अधिक वसूली जा रही थी, जिससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था।
डीएम ने स्पष्ट किया कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 के तहत किसी भी विद्यालय द्वारा अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद ऐसी शिकायतें मिलने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
जारी आदेश के अनुसार अब कोई भी विद्यालय संचालक या प्राचार्य विद्यार्थियों को किसी एक दुकान से यूनिफॉर्म, जूते, टाई, पुस्तकें या अन्य स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं करेगा। साथ ही सभी निजी विद्यालयों को 15 अप्रैल 2026 तक प्रत्येक कक्षा की अनिवार्य पुस्तकों की सूची और यूनिफॉर्म का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा तथा विद्यालय परिसर में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा।
इसके अतिरिक्त विद्यालयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित यूनिफॉर्म में कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव न किया जाए, ताकि अभिभावकों पर बार-बार अतिरिक्त खर्च का दबाव न पड़े।
डीएम ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-223 तथा बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 की धारा-7 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में विद्यालय के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक और बोर्ड के सदस्य भी जिम्मेदार माने जाएंगे।
साथ ही प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो इसकी सूचना जिला गोपनीय शाखा को फोन या ईमेल के माध्यम से दें। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और 31 मई 2026 तक प्रभावी रहेगा।



