✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
सिवान की पहचान बनी ऐतिहासिक जोड़ी, नई पीढ़ी को प्रेरित करने का प्रयास
- 30 मार्च से 05 अप्रैल तक राजेंद्र स्टेडियम में होगा टूर्नामेंट
- विजेता टीम को ₹51,000, उपविजेता को ₹31,000 पुरस्कार
- नम्मू–नसीम की याद में राज्य स्तरीय आयोजन
- नई पीढ़ी को खेल विरासत से जोड़ने की पहल
सिवान की खेल संस्कृति में कुछ नाम ऐसे हैं, जो समय के साथ फीके नहीं पड़ते, बल्कि और भी चमकते जाते हैं। फुटबॉल की दुनिया में “नम्मू–नसीम” ऐसी ही एक जोड़ी है, जिसने न सिर्फ सिवान बल्कि पूरे बिहार में अपनी अलग पहचान बनाई। आज भी जब फुटबॉल के स्वर्णिम दौर की चर्चा होती है, तो सबसे पहले नईमुल हक़ (नम्मू बाबू) और नसीमुल हक (नसीम बाबू) का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

इन्हीं महान खिलाड़ियों की स्मृति में अब “नम्मू–नसीम मेमोरियल राज्य स्तरीय फुटबॉल टूर्नामेंट, सिवान – 2026” का आयोजन किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ 30 मार्च 2026 को होगा और फाइनल मुकाबला 05 अप्रैल 2026 को खेला जाएगा। प्रतियोगिता में विजेता टीम को ₹51,000 और उपविजेता टीम को ₹31,000 की आकर्षक पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी, जिससे खिलाड़ियों का उत्साह और प्रतिस्पर्धा दोनों चरम पर रहने की उम्मीद है। 
हालांकि यह टूर्नामेंट खेल प्रतियोगिता से कहीं अधिक भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह आयोजन सिवान की उस गौरवशाली विरासत को जीवित रखने का प्रयास है, जिसे नम्मू और नसीम जैसे खिलाड़ियों ने अपने पसीने और प्रतिभा से गढ़ा था।
नईमुल हक़ और नसीमुल हक, दोनों भाई सिवान के गुलजार मंजिल दरबार के निवासी थे और उनका जुड़ाव शहर के प्रतिष्ठित यूनाइटेड क्लब, सिवान से था। यह क्लब 1952 में स्थापित हुआ था और उस समय के पूर्व सांसद युसुफ मोहम्मद युसुफ इसके अध्यक्ष रहे। खास बात यह रही कि नम्मू और नसीम बाबू, युसुफ साहब के ही भतीजे थे। खेल के प्रति समर्पण और अनुशासन उन्हें परिवार से ही विरासत में मिला।

इन दोनों खिलाड़ियों का स्वर्णिम दौर 1960 से 1985 के बीच माना जाता है। उस समय सिवान अलग जिला नहीं था, बल्कि सारण का हिस्सा हुआ करता था। इसी दौरान दोनों भाई सारण टीम के लिए लगातार खेले और अपनी प्रतिभा से पूरे बिहार में पहचान बनाई।
नसीमुल हक को एक शानदार स्ट्राइकर के रूप में जाना जाता था। मैदान पर उनकी मौजूदगी ही विरोधी टीम के लिए चुनौती बन जाती थी। उनकी बॉल कंट्रोल, गेम की समझ और गोल करने की क्षमता इतनी प्रभावशाली थी कि दर्शक उनकी हर चाल पर नजरें टिकाए रहते थे। जब गेंद उनके पास होती थी, तो माहौल में एक अलग ही रोमांच पैदा हो जाता था।

वहीं नईमुल हक़ उर्फ नम्मू बाबू अपनी ताकत और आक्रामक खेल के लिए मशहूर थे। उनकी किक में इतनी शक्ति होती थी कि गेंद सीधे गोलपोस्ट की ओर बिजली की तरह बढ़ती थी। उनकी पावरफुल शॉट्स और दमदार खेल शैली ने उन्हें भीड़ का चहेता बना दिया था। लोग उनके खेल को देखने के लिए बेसब्री से इंतजार करते थे।

इन दोनों की जोड़ी इतनी प्रसिद्ध थी कि “नम्मू–नसीम” नाम खुद में एक पहचान बन गया था। बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के कई इलाकों में इस जोड़ी की चर्चा होती थी। यह कहना गलत नहीं होगा कि उस दौर में यह जोड़ी एक ब्रांड बन चुकी थी।
इनकी प्रतिभा को और निखारने में उस समय के महान फुटबॉलर मेवालाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जो भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उनके मार्गदर्शन में नम्मू और नसीम ने अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उसी दौर में पी.के. बनर्जी, चुन्नी गोस्वामी और जुल्फिकार जैसे दिग्गज भारतीय फुटबॉल में सक्रिय थे, और नम्मू–नसीम भी उसी स्वर्णिम पीढ़ी के प्रभावशाली खिलाड़ी माने जाते थे।

नसीमुल हक की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि वे बिहार यूनिवर्सिटी, मुजफ्फरपुर के कप्तान भी रहे। यह उनके नेतृत्व और खेल की समझ का प्रमाण है। बाद में उन्होंने जिला खेल संघ में सचिव के रूप में भी कार्य किया और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
आज जब समय बदल चुका है और खेल की दुनिया में नई तकनीक और नए खिलाड़ी आ गए हैं, तब भी “नम्मू–नसीम” की विरासत सिवान के दिलों में जिंदा है। यही कारण है कि उनके सम्मान में आयोजित यह टूर्नामेंट सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक श्रद्धांजलि है।

यह राज्य स्तरीय टूर्नामेंट सिवान के राजेंद्र स्टेडियम में आयोजित होगा, जिसका आयोजन यूनाइटेड क्लब सिवान (दरबार) द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन के जरिए न सिर्फ पुराने दौर की यादों को ताजा किया जाएगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी यह बताया जाएगा कि सिवान की मिट्टी में कितनी बड़ी खेल प्रतिभाएं जन्म ले चुकी हैं।
नम्मू–नसीम की कहानी सिर्फ दो खिलाड़ियों की कहानी नहीं है, बल्कि यह सिवान की पहचान, संघर्ष, जुनून और खेल के प्रति समर्पण की कहानी है। यह जोड़ी आज भी प्रेरणा है—और आने वाले समय में भी सिवान के खिलाड़ियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

