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May 25, 2026 11:39 pm

मुझे यकीन है बनकर विकास का सूरज,बिहार सारे ज़माने को रौशनी देगा

✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन ची

  • बिहार दिवस पर सिवान टाउन हॉल में सजा भव्य कवि सम्मेलन व मुशायरा
  • चार घंटे तक गूंजती रही साहित्य की आवाज,
  • कवियों-शायरों ने बांधा समां
  • टाउन हॉल में आयोजित हुआ भव्य कवि सम्मेलन व मुशायरा
  • उस्ताद शायर कमर सिवानी की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम
  • डॉ जाहिद सिवानी ने किया मंच संचालन
  • कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने जमकर सराहना की

जिला प्रशासन सिवान के तत्वाधान मे बिहार दिवस समारोह के अवसर पर टाऊन हॉल में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं मोशायरा का आयोजन किया गया।जिसकी अध्यक्षता उस्ताद शायर कमर सिवानी एवं मंच संचालन युवा शायर डॉ जाहिद सिवानी ने किया। कवि सम्मेलन एवं मोशायरा शुरू होने से पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी को डॉ जाहिद सिवानी ने ग्रीन प्लांट पोत दे कर स्वागत किया।उक्त अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने सभी कवियों एवं शायरों का स्वागत ग्रीन पौधों के गमलों और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने उक्त अवसर पर अपना उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का बिहार बिल्कुल अनोखा है पूरे विश्व में इस प्रांत के गुणों की चर्चा होती रहती है। कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं माहौल को मात मुग्ध कर दिया।


लगातार चार घंटे तक सभी श्रोता साहित्यिक दुनिया में बिहार की प्रशंसाओं में डुबकियां लगाते रहे। कार्यक्रम सहायक विश्वरंजन जी ने कार्य क्रम को सफल बनाने के लिए जी जन लगा दिया।
उक्त अवसर पर जिन कवियों और शायरों की पंक्तियां बेहद पसंद की गईं वो निम्न हैं:
कमर सिवानी।
मुझे यकीन है बनकर विकास का सूरज।
बिहार सारे ज़माने को रौशनी देगा।
फैज अली फैजी।
मैं भी कदम जमाए खड़ा था बजोमे खुद।
लेकिन मुझे भी रात उड़ा ले गई हवा।
डॉ जाहिद सिवानी।
बिहार की अजमत को बढ़ाने के लिए आ।
बिछड़े हुए दिलों को मिलाने के लिए आ।
आज़म सिवानी।
तुम्हें मिलेगी शराफत बिहार आ जाओ।
यहां मिलेगी मोहब्बत बिहार आ जाओ।
सोहैल पैग़म्बरपुरी।
आओ नफरत का हर एक शोला बुझाया जाए।
एक नया शहर मोहब्बत का बसाया जाए ।
बिपिन शर्मा शरार।
सदा मौसम बहारों का नहीं होता मुकद्दर में।
गुलाबी हर घड़ी रुखसार हो ऐसा नहीं होता।
डॉ नीलम श्रीवास्तव।
थाह लग जाएगी तेरी औकात की।
हम बगावत पर जिस दिन उतर आए।
डॉ तृप्ति रक्षा।
मेरे मालिक मेरे ईश्वर हमें बस हौसला देना।चलो नफरत के प्याले में मोहब्बत घोल आएं हम।
अस्तित्व अंकुर।
आप जितनी नेकियों के साथ हैं अखबार में।
उतनी तो हर रोज दरिया में बह देते हैं हम।
रेहान मुस्तफाबादी।
नफरत की लगी आग बुझा क्यों नहीं देते।
दीवार अदावत की गिरा क्यों नहीं देते।
इनके अतिरिक्त मनोज कुमार वर्मा,सुरेश गगन,सज्जाद अली , मोहम्मद वसीम,तेजा जी ,राम किशुन अकेला,इत्यादि भी उपस्थित रहे।


अंत में सबका धन्यवाद ज्ञापन पर समापन का ऐलान किया गया।

 

 

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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