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March 23, 2026 3:59 am

हसनपुरा : श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के प्रथम श्रोता थे भईया शत्रुघ्न : डॉ. लवी मैत्रेय शर्मा

✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ

राम जन्मोत्सव महायज्ञ के तीसरे दिन लव-कुश प्रसंग ने भावुक किया श्रद्धालुओं को

  • डॉ. लवी मैत्रेय शर्मा ने सुनाया लव-कुश जन्म और शत्रुघ्न प्रसंग
  • वाल्मीकि आश्रम में शत्रुघ्न को पहली बार सुनाई गई राम कथा
  • लवणासुर वध और मथुरा स्थापना का किया विस्तार से वर्णन
  • कथा के अंत में आरती व प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन

हसनपुरा (सिवान) : हसनपुरा नगर पंचायत के उसरी शिव मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्र एवं हिन्दू नववर्ष के पावन अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम जन्मोत्सव सह श्रीरामचरितमानस नवाह परायण महायज्ञ के तीसरे दिन शनिवार संध्या श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

व्यास मंच पर विराजमान श्रीधाम वृंदावन से पधारी रामकथा मर्मज्ञ डॉ. लवी मैत्रेय शर्मा ने श्रद्धालु भक्तों को लव-कुश जन्म, शत्रुघ्न द्वारा जातकर्म संस्कार, लवणासुर वध तथा राम कथा के प्रथम श्रवण का विस्तृत वर्णन सुनाया।


उन्होंने बताया कि माता सीता ने वाल्मीकि आश्रम में लव और कुश को जन्म दिया, जहां महर्षि वाल्मीकि ने दोनों को वेद, रामायण और युद्ध कला की शिक्षा दी। इसी क्रम में अयोध्या से लवणासुर वध के लिए जाते समय राजकुमार शत्रुघ्न वाल्मीकि आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने लव-कुश का जातकर्म संस्कार किया।
कथा वाचिका ने कहा कि लवणासुर, जो मधुपुर (वर्तमान मथुरा) का राजा और रावण का संबंधी था, महादेव का परम भक्त था और उसके पास दिव्य त्रिशूल था। च्यवन ऋषि की सलाह पर शत्रुघ्न ने उचित समय पर आक्रमण कर उसका वध किया और मधुपुर नगरी की स्थापना की।
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मधुपुर विजय के बाद जब शत्रुघ्न पुनः वाल्मीकि आश्रम लौटे, तब महर्षि वाल्मीकि के आदेश पर लव-कुश ने पहली बार राम कथा का गायन किया। उस समय व्यासपीठ पर लव-कुश और प्रथम श्रोता के रूप में भईया शत्रुघ्न विराजमान थे।


आगे उन्होंने बताया कि गुरु की आज्ञा से लव-कुश अयोध्या की गलियों में राम कथा का प्रसार करते हैं, जिससे पूरे नगर में चर्चा होने लगती है। जब यह बात राजदरबार तक पहुंचती है, तब भगवान श्रीराम स्वयं उन्हें बुलाकर रामायण सुनने का आग्रह करते हैं।
लव-कुश द्वारा गाया गया भजन “हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की” सुनकर पूरी सभा भावविभोर हो उठी। श्रीराम भी इस कथा को सुनकर अत्यंत भावुक हो गए और अंततः लव-कुश के दिव्य स्वरूप को पहचानकर उन्हें गले लगा लिया।
कथा के माध्यम से अयोध्यावासियों को माता सीता के त्याग और पवित्रता का गहरा बोध हुआ। कार्यक्रम के अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ तीसरे दिन की कथा को विराम दिया गया।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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