✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन महाराज ने सुनाया भावपूर्ण प्रसंग
- वीएमएचई इंटर कॉलेज परिसर में श्रीराम कथा का सातवां दिन आयोजित।
- राजन महाराज ने केवट प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया।
- भजन और प्रवचन के बीच मां गंगा की महिमा का भी किया वर्णन।
- कई गणमान्य लोग कार्यक्रम में अतिथि के रूप में रहे उपस्थित।
सिवान: शहर के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन महाराज ने केवट प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान मधुर स्वरलहरियों में प्रस्तुत भजन “करूणानिधान रउआ जगत के दाता हई” पर उपस्थित श्रद्धालु भावाभिभूत हो गए और पूरा वातावरण भक्ति भाव से सराबोर हो उठा।

कथा के दौरान राजन महाराज ने पर्यावरण संरक्षण और मां गंगा की महिमा का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के कार्य में हमेशा सहयोग करना चाहिए और उनके मार्ग में बाधा उत्पन्न करने वाला व्यक्ति कलंक का भागी बनता है। उन्होंने कहा कि संसार में जो कुछ भी होता है, वह प्रभु श्रीराम की कृपा से ही संभव होता है।
शनिवार को श्रीराम कथा का शुभारंभ मुख्य यजमान सुभाष प्रसाद, धर्मशिला देवी तथा सह यजमान रूपेश कुमार और नेहा गुप्ता सहित अन्य यजमानों द्वारा श्रीरामचरितमानस की आरती के साथ हुआ। दैनिक यजमानों में इंजीनियर अशोक कुमार पांडेय, अनीता पांडेय, राजीव चौबे, पुष्पा चौबे, वैभव कुमार, प्रीति चौरसिया और कन्हैया समेत कई श्रद्धालु शामिल रहे।

कथा का प्रसंग भगवान श्रीराम के मिथिला से विवाह के बाद अयोध्या आगमन से आरंभ हुआ। राजन महाराज ने कहा कि यदि मनुष्य जीवन में आनंद चाहता है तो अयोध्याकांड की प्रथम आठ चौपाइयों का नियमित पाठ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में सुख केवल धन से नहीं मिलता, बल्कि संतोष से ही सच्चा आनंद प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि संसार के लोग धन के कारण मुस्कुराते हैं, लेकिन सच्ची खुशी त्याग और संतोष में है। राम नाम का स्मरण करते हुए अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, तभी प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने भिक्षु और भिखारी के अंतर को समझाते हुए कहा कि भिक्षु त्याग और साधना का प्रतीक होता है, जबकि भिखारी केवल मांगने वाला होता है।
राजन महाराज ने अयोध्या कांड का प्रसंग बताते हुए कहा कि जब महाराज दशरथ भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक करने की तैयारी कर रहे थे, उसी समय मंथरा के प्रभाव में आकर माता कैकेयी ने राम के वनवास और भरत के राज्याभिषेक का वरदान मांग लिया। उन्होंने कहा कि इसमें माता कैकेयी का कोई दोष नहीं था, यह सब प्रभु की लीला थी।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति राम से विमुख हो जाता है उसकी बुद्धि कभी भी बदल सकती है। सफलता के समय कई लोग श्रेय लेने आते हैं, लेकिन असफलता के समय वही लोग दूर हो जाते हैं। इसलिए मनुष्य को संसार के बजाय अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। सच्चा स्नेही वही है जो कठिन समय में भी साथ खड़ा रहे।
कथा के दौरान महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विद्याभारती के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह, विभाग निरीक्षक अनिल कुमार राम, राजेश रंजन, कृष्ण प्रसाद, ललित राय, प्रधानाचार्य डॉ. कुमार विजय रंजन, कमलेश सिंह, भाजपा नेता मुकेश कुमार बंटी, वीएमएचई के प्रधानाचार्य राकेश कुमार सिंह और शिक्षाविद् पुष्पेंद्र पाठक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

