✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
श्रीराम कथा में प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन, सोहर प्रस्तुति पर झूमे श्रद्धालु
• वीएम हाई स्कूल परिसर में चल रही श्रीराम कथा का चौथा दिन
• प्रभु श्रीराम के चूड़ाकर्म, नामकरण और यज्ञोपवित संस्कार का वर्णन
• पंच पल्लव के पौधों का वितरण कर दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
• सोहर की प्रस्तुति पर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
सिवान : शहर के वीएम हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज परिसर में बुधवार की शाम अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन महाराज ने श्रीराम कथा के चौथे दिन प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का मनोहारी चित्रण किया। कथा के दौरान उन्होंने सोहर “राजा जी खजनवा दे द, रानी जी गहनवा दे द” की प्रस्तुति दी, जिस पर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे।
राजन महाराज ने प्रभु श्रीराम के चूड़ाकर्म, नामकरण और यज्ञोपवित संस्कार का विस्तार से वर्णन किया। कथा सुनते हुए श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पंच पल्लव के पौधे भी वितरित किए गए।
उन्होंने कहा कि अयोध्या नगरी में भगवान श्रीराम के जन्म के बाद से ही उत्सव का माहौल बन गया था। पूरे वातावरण में ऐसी पवित्र सुगंध फैल गई थी कि जिसका स्मरण मात्र से जीवन धन्य हो जाता है। प्रभु श्रीराम के बाल रूप को पाकर अयोध्या नगरी आनंदित हो उठी।
नामकरण संस्कार का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु ने बताया कि राम आनंद स्वरूप हैं, भरत प्रेम की मूर्ति हैं, शत्रुघ्न मौन के प्रतीक हैं और लक्ष्मण सेवा के पर्याय हैं।
राजन महाराज ने कहा कि जीवन का वास्तविक आनंद वही है जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, उसे केवल अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान का भजन करना कोई कठिन कार्य नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अपनी बुरी आदतों को सुधार ले तो वही सच्चा भजन है। आदतों में सकारात्मक सुधार ही भजन है और मन की तरंगों पर नियंत्रण रखना ही भजन है।
उन्होंने कहा कि जब मन, कर्म और वचन से चतुराई का लोप हो जाता है तो जीवन सरल हो जाता है और भगवान की प्राप्ति संभव हो जाती है। ज्ञान प्राप्ति के लिए विद्यालय महत्वपूर्ण स्थान हैं, लेकिन विद्यालयों में संस्कार और विवेक की शिक्षा भी आवश्यक है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है।
कथा की शुरुआत यजमानों द्वारा श्रीरामचरितमानस की आरती से हुई। इस अवसर पर मुख्य यजमान सुभाष प्रसाद व धर्मशिला देवी के साथ डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. सीमा सौरभ, रामप्रकाश मुन्ना, सीटू देवी, ललितेश्वर प्रसाद, निर्मला देवी, रमन कुमार, मधुप्रिया, तारकेश्वर यादव सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थे।

