बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड (संशोधन) विधेयक 2026 पारित, प्रबंधन ढांचे व सेवा नियमों में व्यापक बदलाव
✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
शिक्षकों को अपील का अधिकार, प्रबंधन समिति का पुनर्गठन, बोर्ड का निर्णय होगा बाध्यकारी
पटना/सिवान। बिहार विधानसभा ने 26 फरवरी 2026 को बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। यह संशोधन वर्ष 1981 के मूल अधिनियम में आवश्यक परिवर्तन करते हुए प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कानूनी रूप से स्पष्ट बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
प्रबंधन समिति की नई संरचना
संशोधन के तहत मदरसों की प्रबंधन समिति की संरचना में परिवर्तन किया गया है। अब समिति में मदरसा के प्रधान मौलवी, एक शिक्षक प्रतिनिधि, दो अभिभावक प्रतिनिधि तथा बोर्ड द्वारा नामित एक सदस्य शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त समिति द्वारा ऐसे सदस्यों को भी जोड़ा जा सकेगा, जिन्हें मदरसा शिक्षा या इस्लामी अध्ययन में विशेष रुचि अथवा अनुभव हो।
सरकार का तर्क है कि इस बदलाव से प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और विभिन्न हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
सेवा संबंधी मामलों में स्पष्ट प्रक्रिया
विधेयक में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सेवा शर्तों को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े गए हैं। यदि किसी मान्यता प्राप्त मदरसा में कार्यरत शिक्षक या कर्मचारी को प्रबंधन समिति द्वारा निलंबन, पदच्युत या बर्खास्त किया जाता है, तो वह संबंधित आदेश के विरुद्ध तीन महीने के भीतर मदरसा बोर्ड के समक्ष अपील दायर कर सकेगा।
अपील प्राप्त होने के बाद बोर्ड दोनों पक्षों को सुनकर, आवश्यक अभिलेखों की समीक्षा कर और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए लिखित आदेश जारी करेगा। बोर्ड का निर्णय संबंधित मदरसे के लिए बाध्यकारी होगा।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप संशोधन
राज्य सरकार का कहना है कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 30(1) के अनुरूप मदरसा शिक्षा संस्थानों के अधिकारों और प्रशासनिक संरचना को संतुलित करने की दिशा में लाया गया है। इससे एक ओर अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर जवाबदेही और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
राजनीतिक व शैक्षणिक हलकों में चर्चा
विधेयक पारित होने के बाद शैक्षणिक एवं राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का मानना है कि इससे शिक्षकों को न्यायिक सुरक्षा मिलेगी और मनमानी कार्रवाई पर रोक लगेगी। वहीं कुछ संगठनों ने विस्तृत नियमावली जारी होने के बाद ही अंतिम प्रतिक्रिया देने की बात कही है।
फिलहाल, सरकार की ओर से कहा गया है कि अधिनियम के लागू होने की अधिसूचना जारी होते ही नए प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे।
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