इबादत कर अल्लाह की बेपनाह रहमतें बटोरने का महीना है रमजान: मौलाना जमील अमजदी
✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
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रमजान आत्मशुद्धि और परहेजगारी का पवित्र महीना
शहर के एमएम कॉलोनी स्थित मदरसा अमजदिया के सचिव मौलाना जमील अमजदी ने रमजानुल मुबारक की फजीलत बयान करते हुए कहा कि इबादत कर अल्लाह की बेपनाह रहमतें बटोरने का महीना रमजान है। उन्होंने कहा कि इस पाक महीने में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग पुरुष व महिलाएं सुबह से शाम तक रोजा रखकर और इबादत में मशगूल रहकर अल्लाह की रजा हासिल करने की कोशिश करते हैं।
मौलाना ने कुरआन शरीफ की आयत का हवाला देते हुए कहा कि ऐ ईमान वालों, तुम पर रोजे फर्ज किए गए, जैसा कि तुमसे पहले की उम्मतों पर फर्ज किए गए थे, ताकि तुम परहेजगार बन सको। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जानबूझ कर एक रोजा छोड़ देता है, वह यदि पूरी जिंदगी भी रोजा रख ले तो उस एक छोड़े गए रोजे की भरपाई नहीं कर सकता।
उन्होंने बताया कि अल्लाह तआला का फरमान है कि रोजा सिर्फ मेरे लिए है और मैं ही इसका बदला दूंगा। रोजेदार के लिए दो खुशियों का समय होता है—एक इफ्तार के वक्त, जब दिन भर की भूख-प्यास के बाद रोजा खोला जाता है, और दूसरा कयामत के दिन, जब वह अपने रोजे का बदला अल्लाह से पाएगा।
मौलाना जमील अमजदी ने कहा कि माह-ए-रमजान आत्मा को शुद्ध करने का सबसे बड़ा जरिया है। यह महीना इंसान को बुराइयों से दूर रहने, अच्छे कार्य करने और नेकी कमाने का संदेश देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि अपनी नीयत, व्यवहार और चरित्र को सुधारने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि सच्चा मुसलमान वही है जो इस मुकद्दस महीने की कद्र करे और अधिक से अधिक नेकी कमाने की कोशिश करे। इसी पवित्र महीने में कुरआन शरीफ नाजिल हुआ था, इसलिए इसकी तिलावत करना अत्यंत सवाब का काम है। रमजान में की गई हर नेकी का सवाब अल्लाह कई गुना बढ़ा देता है।

