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February 4, 2026 7:50 am

नीतीश कुमार का सिवान आगमन: विश्वास, विकास और सामाजिक न्याय की पुनः पुष्टि

नीतीश कुमार का सिवान आगमन: विश्वास, विकास और सामाजिक न्याय की पुनः पुष्टि

✒️ डॉ. हाफ़िज़ मो. क़ारीमुल्लाह
(पूर्व प्राचार्य, ZH यूनानी मेडिकल कॉलेज | महासचिव, बिहार प्रदेश,जदयू मेडिकल सेल)

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सिवान आगमन केवल एक प्रशासनिक दौरा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति और समाज के लिए गहरे अर्थों वाला संदेश है। यह संदेश है—विश्वास का, समावेश का और उस विकास-दृष्टि का, जिसने बिहार को अराजकता से निकालकर सुशासन की राह पर खड़ा किया। सिवान की धरती पर उनका स्वागत इस बात का प्रमाण है कि जनता आज भी उनके कार्यों को स्मरण करती है और भविष्य के लिए उनसे अपेक्षाएँ रखती है।
नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन सत्ता की चाह से नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व से संचालित रहा है। वे केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं—ऐसा व्यक्तित्व, जिसने कठिन समय में साहसिक निर्णय लेकर समाज के सबसे कमजोर वर्गों के साथ खड़े होने का साहस दिखाया। उनके जैसा नेतृत्व दुर्लभ है, जो विकास को सामाजिक न्याय से जोड़कर देखता हो।


वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने जो पहला बड़ा कदम उठाया, वह आज भी उनकी नैतिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। भागलपुर दंगों की फाइलें खुलवाकर दोषियों को कानून के कटघरे तक पहुँचाना आसान नहीं था। पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में जिन अपराधियों को संरक्षण मिलता रहा, उन्हें सजा दिलाना राजनीतिक जोखिम से भरा था। लेकिन नीतीश कुमार ने जोखिम उठाया—क्योंकि उनके लिए न्याय राजनीति से ऊपर था। यह कदम न केवल पीड़ितों के घावों पर मरहम था, बल्कि यह संदेश भी था कि बिहार में अब कानून से ऊपर कोई नहीं।भागलपुर दंगा पीड़ितों के प्रति नीतीश कुमार की संवेदनशीलता केवल न्यायिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। उन्होंने पीड़ित परिवारों की आर्थिक पीड़ा को भी गंभीरता से समझा। दंगा प्रभावित कई परिवार ऐसे थे जो पुनर्वास और इलाज के लिए लिए गए कर्ज़ के बोझ तले दबे हुए थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने न सिर्फ उनकी आर्थिक सहायता सुनिश्चित की, बल्कि उनके ऊपर चल रहे लोन का बोझ भी समाप्त कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह कदम साबित करता है कि उनका दृष्टिकोण केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय भी रहा है। पीड़ितों को न्याय के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन लौटाने की यह पहल बिहार के शासन इतिहास में एक मिसाल के रूप में दर्ज है।

अल्पसंख्यक समाज के लिए किए गए उनके कार्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। मैट्रिक में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को ₹10000 की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा साधारण प्रतीत हो सकती है, लेकिन इसका सामाजिक प्रभाव असाधारण रहा। इससे न केवल अल्पसंख्यक बच्चों का स्कूलों में नामांकन बढ़ा, बल्कि शिक्षा के प्रति भरोसा भी मजबूत हुआ। यह पहल बताती है कि जब सरकार सही दिशा में छोटा कदम भी उठाती है, तो उसका असर पीढ़ियों तक जाता है।
नीतीश कुमार की राजनीति का मूल मंत्र रहा है—सबके लिए काम, बिना भेदभाव। उन्होंने जाति, मज़हब और धर्म से ऊपर उठकर शासन किया। पिछड़े और अतिपिछड़े वर्गों को वास्तविक सम्मान दिलाने का कार्य उन्होंने ही किया। आरक्षण की प्रभावी व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ, और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व—इन सबके माध्यम से उन्होंने उन तबकों को आवाज़ दी, जिन्हें दशकों तक हाशिए पर रखा गया था।
सिवान आगमन के दौरान जो उत्साह दिखा, वह इस बात का संकेत है कि जनता विकास और सुशासन के उस मॉडल को आज भी प्रासंगिक मानती है। सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था—इन सभी क्षेत्रों में निरंतरता ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। राजनीति में स्थायित्व और प्रशासन में ईमानदारी का यह संगम आज दुर्लभ है।
आज जब देश और राज्य कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब नीतीश कुमार जैसे अनुभवी और संतुलित नेतृत्व की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। सिवान की धरती से उनका संदेश साफ है—बिहार का भविष्य समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और आपसी विश्वास पर ही टिका है। यही उनकी राजनीति की पहचान रही है और यही उनकी सबसे बड़ी विरासत।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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