बिहार में गैर अनुदानित मदरसों की मान्यता और अल्पसंख्यक दर्जा दिलाने को लेकर आयोग अध्यक्ष को सौंपा गया ज्ञापन
✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
1646 मदरसों की मान्यता व अल्पसंख्यक दर्जा दिलाने की मांग, आयोग अध्यक्ष से की गई विशेष पहल
पटना: ऑल मदरसा युवा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना इमरान आलम के नेतृत्व में बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मौलाना गुलाम रसूल बलियावी को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा गया। इसमें राज्य के 1646 गैर अनुदानित मदरसों को बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड से मान्यता दिलाने तथा राज्य के सभी मदरसों को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान का दर्जा प्रदान करने की मांग की गई।![]()

यह ज्ञापन मदरसा प्रबंधन समितियों, उलेमा, बुद्धिजीवियों और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संगठनों की सामूहिक भागीदारी में सौंपा गया। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि ये मदरसे वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और हजारों विद्यार्थियों को धार्मिक व आधुनिक शिक्षा दे रहे हैं। इसलिए इन संस्थानों को न सिर्फ आधिकारिक मान्यता मिलनी चाहिए बल्कि इन्हें सरकारी सहायता भी दी जानी चाहिए, ताकि इनका संचालन बेहतर ढंग से हो सके।
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ज्ञापन में यह भी कहा गया कि संविधान के अनुसार अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने व संचालित करने का अधिकार है। इसलिए सभी मदरसों को संवैधानिक आधार पर अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया जाए, ताकि वे सरकारी हस्तक्षेप से सुरक्षित रह सकें और अपने ढांचे को मजबूत कर सकें।
अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे स्वयं बिहार के मुख्यमंत्री से मिलकर यह मांग प्रस्तुत करेंगे और जल्द समाधान के लिए ठोस प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की रक्षा और उनका विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मौलाना बलियावी ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार अल्पसंख्यकों की तरक्की और कल्याण को लेकर गंभीर है, और वे यह प्रयास करेंगे कि मदरसों की मान्यता व सहायता में जो भी कानूनी या तकनीकी अड़चनें हैं, उन्हें दूर कर इन संस्थानों को उनका वाजिब हक दिलाया जा सके।
इस ज्ञापन को बिहार में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। शैक्षणिक हलकों, धार्मिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इस प्रयास का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि मौलाना गुलाम रसूल बलियावी की नेतृत्व में मदरसों की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आएगा और उन्हें उनका सही स्थान प्राप्त होगा।