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March 20, 2026 10:17 am

सिवान : “उर्दू किसी खास कौम की भाषा नहीं, बल्कि आम जनता की जुबान है” – फरोग-ए-उर्दू सेमिनार में वक्ताओं ने दी राय

✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ

सिवान के मखदूम सराय स्थित स्कूल में अंजुमन उर्दू-हिंदी साहित्य शुक्ल टोली के बैनर तले हुआ आयोजन, कवि सम्मेलन और मुशायरे ने बांधा समां

सिवान : शहर के मखदूम सराय स्थित एक निजी स्कूल परिसर में रविवार को अंजुमन उर्दू हिंदी साहित्य शुक्ल टोली के तत्वावधान में “फरोग-ए-उर्दू” विषय पर सेमिनार व कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर कमर सिवानी ने की। इसमें हिंदी और उर्दू साहित्य से जुड़े कई नामचीन शायर, कवि और साहित्यप्रेमी शामिल हुए।

सेमिनार में उर्दू भाषा के विकास, उसकी मिठास, तहजीब और साझा संस्कृति पर प्रकाश डाला गया। कमर सिवानी ने कहा कि उर्दू सिर्फ एक भाषा नहीं, एक तहजीब है जिसे हमें नई पीढ़ी तक पहुंचाना चाहिए। सैनिक मॉडल स्कूल के निदेशक राजन साहब ने कहा, “उर्दू किसी खास कौम की नहीं, बल्कि आम जनता की जुबान है।”

सैयद आरिफ हसैन ने कहा कि उर्दू दिलों को जोड़ने वाली भाषा है, न कि किसी धर्म विशेष की पहचान। वहीं मो. मुईज साहब ने इसे देश की सबसे मीठी जुबान बताया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी व मुशायरे का आयोजन हुआ जिसका संचालन मोहम्मद रेहान ने किया। इस दौरान कई शानदार ग़ज़लों और कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मो. मुश्ताक की ग़ज़ल “मुझसे मेरे हुनर की नुमाईश न हो सकी” और रेहान की “दीवार नफरत की गिराओ तो बात है…” को खूब सराहा गया।

अजय कुमार ‘अजीत’ की ग़ज़ल “रहना जहां भी दोस्त तुम फूल मुहब्बत के खिलाए रखना…” ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

डॉ. एफए आजाद की “हिज्र में रात लज्जत को तरस जाओगे…” और डॉ. प्रवींद की कविता “यही अपनों की बस्ती है…” ने भी दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।

सफीर मखदूमी, हिदायतुल्ला साहब, आरिफ सिवानी, कमर सिवानी और मो. मुईज की प्रस्तुतियों ने भी खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का समापन सैयद आरिफ हसैन के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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