✍🏽परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ
सिवान: “हमारे समाज का वोट लेकर नेता राजनीति की ऊँचाइयों तक पहुँचते हैं, लेकिन हमें ही राजनीतिक भागीदारी से वंचित कर दिया जाता है। अब हम किसी विशेष पार्टी के लिए नहीं, बल्कि अपने समाज के कल्याण के लिए वोट करेंगे और अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी लेकर रहेंगे।” यह बातें सिवान तैलिक साहू समाज के जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता ने कहीं।
वे आरपीएफ कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में आयोजित एक भागवत कथा में शिरकत करने पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वैश्य समाज से वोट तो लिया जाता है, लेकिन सिवान की कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक स्थिति में होने के बावजूद समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं दी जाती और सदन में नहीं भेजा जाता।
वैश्य समाज की राजनीतिक अनदेखी पर नाराजगी
अरुण गुप्ता ने इस दौरान अपने समाज की राजनीतिक स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वैश्य समाज हमेशा से ही चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। सिवान जिले की कई विधानसभा सीटों पर इस समाज के वोट निर्णायक होते हैं। इसके बावजूद हर बार चुनाव में हमारा इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक के रूप में किया जाता है और जब प्रतिनिधित्व देने की बात आती है, तो हमें पीछे कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह अब और सहन नहीं होगा और वैश्य समाज को अब उसकी राजनीतिक हिस्सेदारी मिलकर ही रहेगी।
उन्होंने कहा, “समाज के लोग अपने हक के लिए जागरूक हो रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम अपने भविष्य के बारे में सोचें और राजनीतिक रूप से सशक्त हों। हमें अब सिर्फ किसी एक पार्टी का समर्थक बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी मांगों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। जो भी पार्टी हमें उचित प्रतिनिधित्व देगी, हम उसे समर्थन देंगे।”
जल्द करेंगे बड़ी घोषणा
अरुण गुप्ता ने यह भी बताया कि वैश्य समाज की उपेक्षा को लेकर वे जल्द ही एक प्रेस कांफ्रेंस करने वाले हैं, जिसमें वे एक बड़ा निर्णय लेंगे। हालांकि उन्होंने अभी इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन संकेत दिया कि यह निर्णय समाज के राजनीतिक भविष्य को लेकर अहम होगा।
उन्होंने कहा, “हम सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं रह सकते। हमें सत्ता में भागीदारी चाहिए, ताकि अपने समाज की समस्याओं को उठाने और हल करने के लिए हमारे भी नेता सदन में मौजूद हों।”
चुनाव लड़ने के संकेत
पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वे स्वयं चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं, अरुण गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव लड़ना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि समाज की भलाई के लिए जरूरत पड़ी, तो वे चुनाव भी लड़ सकते हैं, चाहे वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ही क्यों न हो।
उन्होंने कहा, “अगर राजनीतिक दल हमारी मांगों को नजरअंदाज करेंगे, तो हम अपने समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए खुद मैदान में उतरेंगे।”
वैश्य समाज की राजनीतिक शक्ति
वैश्य समाज को लेकर उन्होंने यह भी कहा कि यह समाज व्यापार, शिक्षा और सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहा है। लेकिन जब बात राजनीतिक हिस्सेदारी की आती है, तो इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज के युवा अब इस स्थिति को समझ रहे हैं और वे भी राजनीतिक रूप से जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें और अपने हक की लड़ाई लड़ें।
क्या कहता है राजनीतिक समीकरण?
सिवान जिले में वैश्य समाज की संख्या काफी अच्छी मानी जाती है और कई विधानसभा सीटों पर यह समाज निर्णायक भूमिका में होता है। राजनीतिक दलों के लिए यह समाज महत्वपूर्ण वोट बैंक है, लेकिन अब तक इसे उतनी भागीदारी नहीं दी गई, जितनी अपेक्षित थी।
अरुण गुप्ता का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि वैश्य समाज अब अपनी राजनीतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि आगामी विधानसभा चुनावों में यह समाज अपनी रणनीति कैसे बनाता है और विभिन्न राजनीतिक दलों का इस पर क्या रुख रहता है।

