✍🏽 परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
इफ्तार के दौरान अमन-चैन की दुआ, समाजसेवियों व गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
हसनपुरा प्रखंड के पियाउर गांव में गुरुवार की शाम दावत-ए-इफ्तार का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न समुदायों के गणमान्य लोगों, समाजसेवियों और प्रबुद्धजनों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान क्षेत्र में अमन और शांति की दुआ की गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने एकजुटता और सौहार्द का संदेश दिया।
इस कार्यक्रम के आयोजक मुखिया इम्तियाज अहमद ने कहा कि दावत-ए-इफ्तार का उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारा और समरसता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि पूजा और इबादत दो अलग चीजें नहीं हैं, बल्कि उनका स्वरूप एक ही है, बस तरीके अलग हो सकते हैं। उन्होंने रमजान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महीना मुस्लिम समुदाय के लिए पाक और रहमतों से भरपूर होता है, जो संयम, सहिष्णुता और सेवा की भावना को मजबूत करता है।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. शाहनवाज आलम सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने आयोजन की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि रोजा सिर्फ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा माध्यम है जिससे इंसान को जरूरतमंदों की पीड़ा का एहसास होता है। रमजान के अंत में गरीब और असहाय लोगों की मदद के लिए जकात और फित्रा देने की परंपरा इसी उद्देश्य से बनाई गई है, ताकि समाज में बराबरी की भावना बनी रहे।
कार्यक्रम के दौरान रोजेदारों और अतिथियों का स्वागत किया गया। इफ्तार के बाद सभी ने साथ मिलकर देश और समाज की खुशहाली की दुआ की। इस आयोजन को क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और एकता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

