✍🏽 परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
सिसवन (सिवान): प्रखंड के कचनार स्थित उर्ध्व बाहूं बाबा मठ के प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के तीसरे दिन बुधवार की शाम कथा का आयोजन हुआ। काशी से पधारे कथावाचक मधुकर महाराज ने भगवान के 24 अवतारों की कथा और समुद्र मंथन की गूढ़ व्याख्या प्रस्तुत की।
उन्होंने कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है, जहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न-भिन्न प्रकार के पुष्प खिले हुए हैं। जब कोई अपने गलत कर्मों से इस बगीचे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता है, तब भगवान इस धरा पर अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार करते हैं।
समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए मधुकर महाराज ने कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के भीतर अच्छे और बुरे विचारों का मंथन चलता रहता है। जब अच्छे विचार प्रभावी होते हैं, तो जीवन सुखमय होता है, और जब बुरे विचार हावी होते हैं, तो व्यक्ति दुख और कष्टों से घिर जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को हमेशा अपने विचारों पर नियंत्रण रखने और बुरे विचारों पर विजय प्राप्त कर जीवन को सुखमय एवं आनंदमय बनाने की प्रेरणा दी।
कथा के प्रारंभ में श्रीमद्भागवत भगवान का पूजन एवं आरती की गई। कथा के बीच-बीच में मधुकर महाराज ने भक्तिमय भजनों की संगीतमय प्रस्तुति कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस मौके पर यज्ञ सहयोगी सोनू सिंह, विजेंदर सिंह, वीरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, राजन श्रीवास्तव, छोटू सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

