✍🏽 परवेज़ अख्तर/एडिटर इन चीफ
जिले में पशुपालकों की सेवा के लिए संचालित जिला पशु चिकित्सालय की स्थिति बेहद दयनीय है। भवन के अभाव में यह अस्पताल पशुपालन विभाग के एक छोटे से कमरे में चलाया जा रहा है। इस कमरे में पशुओं के लिए उपलब्ध दवाइयों को जमीन पर रखा जाता है, जिससे दवाइयों के रख-रखाव में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
पशु चिकित्सालय का लैब पूरी तरह से एक कमरे में बंद है, जिससे जांच संबंधी कार्य बाधित हो रहे हैं। आधुनिक सेवाओं का अभाव पशुपालकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। भवन की स्थिति इतनी खराब है कि छत से प्लास्टर टूटकर गिरते रहते हैं, जिससे कर्मचारियों और मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है।
भवन का दरवाजा और खिड़कियां सड़ चुकी हैं, और अधिकांश खिड़कियां टूट चुकी हैं। कर्मचारियों के लिए यहां काम करना खतरनाक हो गया है। कर्मचारियों ने बताया कि वे हर दिन डर के साए में काम करते हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि कब भवन ढह सकता है। यहां तक कि पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण कर्मचारियों और पशुपालकों को पानी के लिए भटकना पड़ता है।
सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर संसाधन तो उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन भवन की मरम्मत या नए भवन का निर्माण करने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. एहसनुल होदा ने बताया कि भवन की स्थिति को लेकर विभाग को पत्र भेजा गया है, लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्देश नहीं आया है।

