✍परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
सिवान : उर्दू निदेशालय पटना के निर्देशानुसार, जिला उर्दू कोषांग के तत्वाधान में और जिला प्रशासन के सहयोग से सिवान के टाउन हाल में “उर्दू का कार्यान्वयन एवं विकास” विषय पर सेमिनार, मुशायरा और कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिलाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता, उप विकास आयुक्त मुकेश कुमार, अपर समाहर्ता उपेंद्र कुमार सिंह, जिला बंदोबस्त पदाधिकारी सुजीत कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी शहबाज खान और जिला उर्दू कोषांग के प्रभारी उपेंद्र कुमार यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसके बाद, “उर्दू उर्दूनामा” पत्रिका का विमोचन भी किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि उर्दू को बिहार राज्य में द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, और राज्य सरकार उर्दू के विकास के लिए सतत प्रयासरत है।
इस अवसर पर उर्दू भाषी विद्यार्थियों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें मैट्रिक, इंटर और स्नातक स्तर के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस प्रतियोगिता में कुल 24 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
प्रथम सत्र में, “उर्दू जबान के जरिए रोजगार के बेहतर इमकानात” विषय पर पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय के प्रो. सफदर इमाम कादरी, डॉ. नीलोफर यासमीन और डॉ. इरशाद अहमद ने अपने विचार व्यक्त किए। वहीं, “स्कूली सतह पर उर्दू तदरीस के मसाएल और उनका हल” पर डीएवी कॉलेज के प्रो. नावेद अंजुम, पटना विश्वविद्यालय की डॉ. अफशा बनो और डॉ. जफ्फर इकबाल ने अपने विचार रखे।
दूसरे सत्र में मुशायरा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में कमर सिवानी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अफशा बनो ने किया।

