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August 6, 2026 10:53 pm

दारौंदा : खेतों में पराली जलाने वाले किसानों को नहीं मिलेगा अनुदान

✍परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ

दारौंदा : दारौंदा प्रखंड में धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे पर्यावरण और कृषि को गंभीर नुकसान हो रहा है। प्रशासन ने पराली जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया है, लेकिन इसके बावजूद किसान इस नियम की अनदेखी कर रहे हैं।

प्रखंड कृषि अधिकारी विक्रमा मांझी ने चेतावनी दी है कि पराली जलाने वाले किसानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे किसानों की कृषि सब्सिडी रोकने और उनकी आइडी ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है, पर्यावरण प्रदूषित होता है, और मित्र कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।

किसानों और पशुपालकों ने पराली जलाने से हो रहे नुकसान पर चिंता व्यक्त की। पराली जलाने से चारे की कमी बढ़ रही है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, खेतों में आग फैलने और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा भी बना रहता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने का मुख्य कारण फसल अवशेष प्रबंधन की कमी है। हार्वेस्टर से कटाई के बाद बचे डंठल जुताई में बाधा बनते हैं। समाधान के लिए किसान रोटावेटर और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, पराली का उपयोग खाद बनाने और पशु चारे के रूप में किया जा सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ भी हो सकता है।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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