✒️ स्वराज सिंह
- बिना मान्यता चल रहे स्कूलों पर प्रशासन सख्त
- RTE Act उल्लंघन पर तत्काल बंद करने का आदेश
- रोजाना ₹10,000 तक जुर्माने का प्रावधान
- अभिभावकों से मान्यता प्राप्त स्कूलों में नामांकन की अपील
शिक्षा विभाग की सख्ती से निजी विद्यालयों में मचा हड़कंप
सीवान जिले के हसनपुरा प्रखंड में संचालित कई निजी विद्यालयों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, क्षेत्र के कई स्कूल बिना सरकारी मान्यता (प्रस्वीकृति) के संचालित पाए गए हैं, जो बच्चों के मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) का उल्लंघन है।
प्रखंड क्षेत्र में जिन विद्यालयों की पहचान की गई है, उनमें एम एस पब्लिक स्कूल हसनपुरा, मॉडल किड्स प्ले स्कूल हसनपुरा, मून रेंज प्ले स्कूल गोला बाजार, एवरग्रीन पाठशाला अरंडा, अपैक्स पब्लिक स्कूल मलाहीडीह, डैफोडील पब्लिक स्कूल नोनियाडीह, साइरस पब्लिक स्कूल नगर पंचायत हसनपुरा, ए लिटिल स्टेप प्ले स्कूल उसरी, संस्कार पब्लिक स्कूल उसरी, न्यू बड्स स्कूल हसनपुरा, द विजन पब्लिक स्कूल, एलिया पब्लिक स्कूल उसरी, अमाफ पब्लिक स्कूल हसनपुरा, शिशु शिक्षा निकेतन पब्लिक स्कूल पकड़ी, टी एन पब्लिक स्कूल तेलकथू, ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल लहेजी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद पब्लिक स्कूल राजनपुरा, सेंट्रल हेलीकांश पब्लिक स्कूल बसंतनगर, न्यू सेंट्रल हेलीकांश पब्लिक स्कूल पियाउर तथा डीएवी पब्लिक स्कूल पकड़ी शामिल हैं।

इस संबंध में निदेशक (प्राथमिक शिक्षा), बिहार के पत्रांक-223 दिनांक 13 फरवरी 2026 एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी, सीवान के पत्रांक-682 दिनांक 28 फरवरी 2026 के माध्यम से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि बिना प्रस्वीकृति संचालित किसी भी निजी विद्यालय को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए और संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर प्रतिदिन 10,000 रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। लगातार आदेश की अवहेलना की स्थिति में कानूनी कार्रवाई करते हुए विद्यालय को स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।
प्रशासन ने सभी संबंधित विद्यालयों के संचालकों एवं प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि वे मान्यता प्राप्त होने तक विद्यालयों का संचालन बंद रखें। आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही विद्यालयों को दोबारा खोलने की अनुमति दी जाएगी।
इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय अभिभावकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कई अभिभावक अचानक स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों का नामांकन केवल मान्यता प्राप्त विद्यालयों में ही कराएं, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शिक्षा मिल सके। प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस अभियान को और तेज किया जाएगा, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

