✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
शुरुआती वाहवाही के बाद अब खराब लाइटों से बढ़ी नाराजगी
- तीन महीने पहले लगाए गए स्ट्रीट लाइट तेजी से हो रहे खराब
- कई वार्डों में अंधेरा, लोगों को हो रही परेशानी
- घटिया गुणवत्ता और कमीशनखोरी के आरोप
- डीएम से जांच और कार्रवाई की मांग तेज
सिवान: हसनपुरा नगर पंचायत में विकास के नाम पर लगाए गए स्ट्रीट लाइट अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। करीब तीन महीने पहले नगर क्षेत्र के विभिन्न वार्डों और मोहल्लों में बड़े पैमाने पर लगाए गए इन स्ट्रीट लाइटों को शुरुआत में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया था। नगर पंचायत की चेयरमैन बेबी गुप्ता ने भी इसे बेहतर रोशनी और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया था।

लेकिन अब हालात बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। महज तीन महीने के भीतर ही अधिकांश स्ट्रीट लाइट खराब होने लगे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वार्ड संख्या 6, 7, 9, 10 और 12 सहित पेट्रोल पंप से हसनपुरा चारमुहानी तक कई इलाकों में रात होते ही अंधेरा छा जाता है। इससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी कम अवधि में लाइटों का खराब होना उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। समाजसेवियों और नागरिकों ने आरोप लगाया है कि नगर पंचायत द्वारा घटिया स्तर के स्ट्रीट लाइट लगाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि बेहतर गुणवत्ता के उपकरण लगाए जाते, तो इतनी जल्दी खराबी नहीं आती। कुछ लोगों ने इस पूरे मामले में कमीशनखोरी की आशंका भी जताई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

मामले को लेकर अब जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों ने सिवान के जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। समाजसेवियों का कहना है कि वे जल्द ही इस मुद्दे को लेकर जिलाधिकारी को औपचारिक आवेदन सौंपेंगे।
इस संबंध में जब नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और काम जारी है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जहां-जहां लाइट खराब है, उसकी जांच कराकर उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
समाजसेवियों का मानना है कि यह केवल सरकारी धन की बर्बादी का मामला नहीं है, बल्कि इससे आम जनता की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। अंधेरे के कारण चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, हसनपुरा के लोग जल्द समाधान और बेहतर रोशनी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।


