✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
हसनपुरा में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीराम जन्मोत्सव समारोह का शुभारंभ
- उसरी शिव मंदिर परिसर में नौ दिवसीय आयोजन शुरू
- कलश यात्रा के साथ संगीतमय श्रीराम कथा का हुआ आगाज
- सती चरित्र के माध्यम से विश्वास और श्रद्धा का संदेश
- सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, भक्ति में डूबा माहौल
हसनपुरा (सीवान)। हसनपुरा नगर पंचायत के उसरी शिव मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्र एवं हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर रामनवमी सेवा समिति, आयुष्मान सेवा संघ, बजरंग दल एवं हिंदू युवा वाहिनी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम जन्मोत्सव समारोह, श्रीरामचरितमानस नवाह परायण महायज्ञ तथा संगीतमय श्रीराम कथा का शुभारंभ गुरुवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।
संगीतीय श्रीराम कथा के प्रथम दिन व्यास पीठ पर विराजमान श्रीधाम वृंदावन से पधारी कथा मर्मज्ञ डॉ. लवी मैत्रेय ने श्रद्धालुओं को सती चरित्र एवं प्रभु श्रीराम के जीवन की महिमा का रसपान कराया। उन्होंने सती चरित्र के माध्यम से संशय और अटूट विश्वास के अंतर को विस्तार से समझाया।
डॉ. मैत्रेय ने कहा कि माता सती द्वारा भगवान शिव की आज्ञा के विरुद्ध प्रभु श्रीराम की परीक्षा लेना उनके मन में उत्पन्न संदेह को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि जब सती ने माता सीता का रूप धारण कर भगवान राम के समक्ष स्वयं को प्रस्तुत किया, तब उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला और अंततः उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ, जिससे उनके दांपत्य जीवन में भी दूरियां आईं। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरु और भगवान पर अटूट विश्वास एवं श्रद्धा ही सच्ची भक्ति का मूल आधार है।
प्रभु श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम जैसा आदर्श चरित्र संसार में दुर्लभ है। वे दयालु, उदार और समस्त मानवता को मार्ग दिखाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम का नाम स्वयं उनसे भी अधिक प्रभावशाली है। सच्ची श्रद्धा से उनका नाम लेने पर असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
उन्होंने अहिल्या उद्धार, शबरी के बेर ग्रहण करने और निषादराज गुह को गले लगाने जैसे प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और समानता का संदेश दिया। यही सच्चे समाजवाद और अंत्योदय की भावना है।
डॉ. मैत्रेय ने कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शन है। कथा श्रवण मात्र से ही मनुष्य के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि जहां प्रभु की कृपा होती है, वहीं रामकथा संभव होती है और जहां सच्चे भक्त रहते हैं, वहीं भगवान की कृपा बनी रहती है।
उन्होंने मानव जीवन में पुरुषार्थ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भगवान ने शरीर दिया है, लेकिन कर्म करना मनुष्य का धर्म है। बिना परिश्रम के सफलता संभव नहीं है।
कथा के अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ प्रथम दिवस की कथा को विराम दिया गया। इस अवसर पर समिति के संयोजक पुरुषोत्तम दास जी महाराज, आचार्य विजय मिश्रा, यज्ञाचार्य पंडित राजू मिश्रा, मुख्य यजमान कृष्णा जी प्रसाद एवं श्रीमती नीतू देवी, विकास तिवारी एवं श्रीमती नेहा देवी, हिंदू युवा वाहिनी के कृष्णा शेखर जायसवाल, सरविंद गुप्ता, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि प्रकाश गुप्ता, रविंद्र कुशवाहा सहित रामनवमी सेवा समिति के कई सदस्य एवं सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

