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June 21, 2026 2:28 pm

सोना न खरीदने की अपील से स्वर्णकार समाज आहत, लाखों कारीगरों की रोजी-रोटी पर संकट : सत्यम भारतीय

✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ

एक साल तक सोना न खरीदने की अपील पर उठा विरोध


  • स्वर्णकार समाज ने पीएम की अपील पर जताई नाराजगी
  • शादी सीजन में कारोबार ठप होने की आशंका
  • लाखों कारीगरों की रोजी-रोटी पर मंडराया संकट
  • सरकार से अपील वापस लेने की मांग तेज

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हैदराबाद की एक रैली में देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील किए जाने के बाद स्वर्णकार समाज में व्यापक नाराजगी देखने को मिल रही है। इस बयान को लेकर देशभर के स्वर्णकारों, ज्वेलरी व्यवसायियों, आभूषण निर्माताओं और छोटे कारीगरों ने चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि यदि लोग एक वर्ष तक सोना खरीदना बंद कर देंगे, तो सदियों पुराना स्वर्ण आभूषण उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा और इससे लाखों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सत्यम भारतीय ने प्रधानमंत्री की इस अपील पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला सीधे तौर पर देश के करोड़ों स्वर्णकारों और कारीगरों के हितों पर चोट करने जैसा है। उन्होंने कहा कि भारत में सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि परंपरा, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा रहा है। विशेषकर शादी-विवाह और त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी भारतीय समाज की पुरानी परंपरा मानी जाती है।
सत्यम भारतीय ने कहा कि देश में लाखों छोटे कारीगर ऐसे हैं, जिनकी पूरी आजीविका सोने और चांदी के आभूषण बनाने पर निर्भर है। यदि सरकार या प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद लोग सोना खरीदना बंद कर देंगे, तो इन कारीगरों की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि बड़े शोरूम और कंपनियां किसी तरह अपना काम चला लेंगी, लेकिन गांव और कस्बों में रहने वाले छोटे स्वर्णकारों के सामने भूखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने के लिए की गई अपील से देश का पूरा स्वर्णकार समाज आहत है। शादियों और त्योहारों के सीजन में सोने की बिक्री रुकने से लाखों कारीगरों और छोटे स्वर्णकारों की रोजी-रोटी पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।”
स्वर्णकार समाज का कहना है कि देश में पहले से ही सोने के कारोबार पर कई प्रकार के नियम और टैक्स लागू हैं, जिसके कारण छोटे व्यवसायी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे समय में यदि सोना खरीदने को हतोत्साहित किया जाएगा, तो इसका सीधा असर बाजार पर पड़ेगा। कारोबारियों के अनुसार शादी-विवाह का सीजन उनके लिए पूरे साल की सबसे महत्वपूर्ण अवधि होती है। इसी दौरान होने वाली बिक्री से हजारों परिवारों का घर चलता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के हैदराबाद में आयोजित भाजपा की रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि वर्तमान समय में देश के लिए विदेशी मुद्रा की बचत बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोने की खरीदारी में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “एक समय था जब संकट और युद्ध की स्थिति में लोग देशहित में सोना दान देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि एक साल तक कोई भी पारिवारिक कार्यक्रम हो, सोना नहीं खरीदेंगे।”
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर व्यापारिक संगठनों तक में बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे देशहित में उठाया गया कदम बता रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में स्वर्णकार और व्यापारी इसे अव्यावहारिक और नुकसानदायक बता रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकार को अन्य विकल्प तलाशने चाहिए, लेकिन किसी विशेष समुदाय या उद्योग की आजीविका को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां सोने का व्यापार केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सोना महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में यदि सोने की मांग में अचानक गिरावट आती है, तो इसका असर केवल ज्वेलरी दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े कारीगर, डिजाइनर, मजदूर और छोटे व्यापारी भी प्रभावित होंगे।
स्वर्णकार संगठनों ने मांग की है कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए और ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे करोड़ों लोगों के रोजगार पर असर पड़े। उन्होंने कहा कि देशहित सर्वोपरि है, लेकिन आर्थिक संतुलन और रोजगार सुरक्षा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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