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April 9, 2026 2:21 am

सेमरी कांड : महेश गुप्ता कौन है, जिसका नाम FIR के आवेदन से काटा गया?

✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ

आवेदन में ओवरराइटिंग से उठे गंभीर सवाल, तीसरे नाम को लेकर बढ़ी चर्चा

  • चंदन सिंह के आवेदन में एक नाम काटे जाने का मामला सामने आया
  • ओवरराइटिंग में “महेश गुप्ता” नाम होने की आशंका
  • पुलिस प्रक्रिया पर उठे सवाल, क्यों स्वीकार हुआ ऐसा आवेदन
  • तीसरे व्यक्ति की भूमिका को लेकर नई बहस तेज

सीवान। एमएच नगर थाना क्षेत्र के सेमरी कांड में अब एक नया और अहम सवाल खड़ा हो गया है। जिस आवेदन के आधार पर कांड संख्या 148/26 दर्ज की गई, उसी आवेदन में एक नाम काटे जाने (ओवरराइटिंग) का मामला सामने आया है।
प्राप्त दस्तावेज के अवलोकन से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि आवेदन में पहले एक नाम लिखा गया था, जिसे बाद में काट दिया गया। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यह नाम “महेश गुप्ता” हो सकता है, जिसे बाद में हटाया गया।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इसी आवेदन में राजद विधायक ओसामा शहाब और डब्लू खान जैसे चर्चित नामों का जिक्र किया गया है। ऐसे में तीसरे व्यक्ति का नाम हटाया जाना पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है।

क्या खुद चंदन सिंह ने काटा नाम या पुलिस ने?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आवेदन में यह ओवरराइटिंग आखिर किसने की?
क्या यह बदलाव स्वयं आवेदक चंदन सिंह ने किया?
या फिर आवेदन पुलिस के पास पहुंचने के बाद इसमें संशोधन किया गया?
इस पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और गहरा गया है।

पुलिस प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

आमतौर पर देखा जाता है कि थाने में यदि किसी आवेदन में मामूली भी कटिंग या ओवरराइटिंग हो, तो पुलिस नया और साफ-सुथरा आवेदन लिखवाने की सलाह देती है।
लेकिन इस मामले में, जहां गंभीर आरोप—फायरिंग, साजिश और राजनीतिक नाम—जुड़े हुए हैं, उसी आवेदन को ओवरराइटिंग के बावजूद स्वीकार कर लिया गया और उसी के आधार पर प्राथमिकी भी दर्ज कर दी गई।
यह स्थिति पुलिस प्रक्रिया और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा कर रही है।

तीसरे नाम की भूमिका क्या थी?

अगर वास्तव में आवेदन में “महेश गुप्ता” नाम लिखा गया था, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि:
उसकी इस पूरे मामले में क्या भूमिका थी?
क्या उसे जानबूझकर हटाया गया?
या फिर यह केवल एक “त्रुटि” थी?
इन सवालों के जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
जांच की दिशा पर असर संभव

विशेषज्ञों का मानना है कि आवेदन में किसी नाम का जोड़ा जाना या हटाया जाना जांच की दिशा को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि पुलिस इस ओवरराइटिंग की भी अलग से जांच करे और स्पष्ट करे कि वास्तविकता क्या है।

अब निगाह प्रशासन पर

सेमरी कांड पहले ही राजनीतिक और आपराधिक एंगल के कारण सुर्खियों में है। ऐसे में आवेदन में हुई ओवरराइटिंग ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
अब देखना होगा कि पुलिस इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक बयान देती है और क्या इस कथित “महेश गुप्ता” की भूमिका की भी जांच की जाती है या नहीं।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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