✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
शराबबंदी के दस साल बाद भी तस्करी जारी, मिलावटी शराब से जान का खतरा
सिवान: जिले में होली पर्व को लेकर अवैध शराब की होम डिलीवरी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। जबकि बिहार में शराबबंदी लागू हुए करीब दस साल हो चुके हैं, इसके बावजूद तस्करों का नेटवर्क लगातार सक्रिय बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार होली के मौके पर शराब तस्कर अधिक मुनाफा कमाने के लालच में मिलावटी शराब की बिक्री कर रहे हैं। इससे पहले भी जिले में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई और कुछ लोग स्थायी रूप से बीमारियों की चपेट में आ गए। ऐसे मामलों ने शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
सूत्रों के अनुसार सिवान और छपरा क्षेत्र में पुलिस की छापेमारी के दौरान कई बार यह सामने आया है कि होम्योपैथी दवा बनाने के नाम पर सप्लायर उत्तर प्रदेश से अलग-अलग तरीकों से स्पिरिट लाते हैं। इसके बाद उसमें पानी और अन्य मिश्रण मिलाकर अवैध शराब तैयार की जाती है। कई बार मिश्रण का संतुलन बिगड़ जाने से शराब जहरीली हो जाती है, जिससे लोगों की जान पर बन आती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की सीमा से शराब नदी के रास्ते जिले में पहुंचाई जाती है। इसमें दोनों राज्यों के तस्कर सक्रिय रहते हैं। बताया जाता है कि यूपी के तस्कर नाव के जरिए बिहार के तस्करों को माल उपलब्ध कराते हैं।
वहीं जिला पुलिस, उत्पाद विभाग और एएलटीएफ द्वारा मुख्य रूप से सड़कों पर जांच अभियान चलाया जाता है, जबकि तस्कर अन्य रास्तों से शराब की आपूर्ति कर देते हैं। इसके बाद अवैध शराब को अधिक कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में कई जगहों पर पुलिस की मिलीभगत भी हो सकती है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है।

