✍🏽 परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
सिवान: कन्हैयालाल जिला केंद्रीय पुस्तकालय सभागार में रविवार को जनवादी लेखक संघ के तत्वावधान में प्रसिद्ध रंगकर्मी, निर्देशक, गीतकार एवं नाटककार सफदर हाशमी के शहादत दिवस के अवसर पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जलेश के युगल किशोर दुबे ने की।
कार्यक्रम का विषय प्रवेश करते हुए मारकंडेय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां बेहद भयावह हैं। आम आदमी के अधिकारों में कटौती हो रही है, पेंशन और सब्सिडी में कटौती के साथ विभिन्न विभागों में ठेके पर बहाली की जा रही है। दूसरी ओर, सांप्रदायिकता को योजनाबद्ध तरीके से भड़काकर देश की बहुलतावादी संस्कृति को क्षत-विक्षत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात हो रहा है, जबकि सुधा भारद्वाज, गौतम नौलखा और उमर खालिद जैसे लोगों को यूपीए कानून के तहत जेल में रखा गया है। वहीं, सांप्रदायिक घृणा फैलाने वालों को महिमामंडित किया जा रहा है।
संगोष्ठी के दौरान सफदर हाशमी की कविताओं का पाठ किया गया, जिसने सभा में एक प्रेरणादायक वातावरण उत्पन्न किया।
इस अवसर पर प्राध्यापक इम्तियाज अहमद, राम नरेश सिंह, डा. के. एहतेशाम अहमद, प्रो. उपेंद्रनाथ यादव, डा. संदीप कुमार यादव, फूल मोहम्मद अंसारी, परमा चौधरी, डा. जगन्नाथ प्रसाद, अधिवक्ता अजय सिंह, अधिवक्ता नागेंद्र पांडेय, कन्हैया चौधरी, डा. जाहिद शिवानी, और अंकेश कुमार समेत अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

