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March 30, 2026 8:25 pm

सिवान : रमजान के आखिरी दिनों में बच्चों ने एतिकाफ कर पेश की इबादत की मिसाल, अमन और भाईचारे की मांगी दुआ

रमजान के अंतिम दिन बच्चों ने भारत में अमन, भाईचारे और समृद्धि की दुआएं मांगी

सिवान के शेख मोहल्ला स्थित दरोगाइन मस्जिद में 21वें रमजान से छोटे-छोटे बच्चों ने एतिकाफ में बैठकर इबादत की मिसाल कायम की। इन बच्चों ने रमजान के आखिरी दिनों में खुद को इबादत में समर्पित करते हुए देश में शांति, भाईचारे और समृद्धि की दुआ मांगी।

एतिकाफ करने वाले बच्चों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. अल्तमश वसी (पिता: इंतेखाब अहमद, उम्र: 11)
  2. मोहम्मद अज़ीज़ (पिता: मोहम्मद अतहर, उम्र: 15)
  3. तौशिफ आलम (पिता: खुश आलम, उम्र: 14)
  4. शाहिद अली (पिता: अशरफ अली, उम्र: 16)
  5. मोहम्मद रेहान (पिता: नौशाद हुसैन, उम्र: 14)
  6. मुन्ना अली (पिता: मोहम्मद असलम, उम्र: 15)
    (सभी निवासी: शेख मोहल्ला, सिवान)

क्या है एतिकाफ़?

एतिकाफ़ इस्लाम की एक स्वैच्छिक और पुण्यप्रद प्रथा है, जिसमें व्यक्ति कुछ दिनों के लिए मस्जिद में रहकर खुद को पूरी तरह से इबादत और आत्मचिंतन में लगाता है। आमतौर पर यह रमजान के अंतिम दस दिनों में किया जाता है। इस दौरान व्यक्ति सांसारिक गतिविधियों से दूर रहता है और कुरान पाठ, प्रार्थना तथा ईश्वर के स्मरण (धिक्र) में लीन रहता है। कुछ परंपराओं के अनुसार, रमजान के दौरान एतिकाफ करना दो हज और दो उमराह के बराबर माना जाता है।

मस्जिद के पेशइमाम जनाब परवेज़ आलम साहब की प्रेरणा से इन बच्चों ने इस धार्मिक परंपरा को अपनाते हुए इबादत की अनूठी मिसाल पेश की, जिससे नई पीढ़ी को भी एक सकारात्मक संदेश मिला।

सम्मान और विदाई समारोह

एतिकाफ के अंतिम दिन बच्चों को उपहार के रूप में वसीम अहमद द्वारा पैजामा-कुर्ता दिया गया। वहीं, जन सुराज नेता और पूर्व जिला अध्यक्ष इंतेखाब अहमद, डॉ. एहतेशाम अहमद, तहसीन किबरिया, फैयाज अहमद, अशफाक आलम और पप्पू अज़ीज़ ने बच्चों का स्वागत फूल-मालाओं से किया। पूर्व नगर परिषद उपाध्यक्ष वसी अहमद ने सभी बच्चों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।

एतिकाफ के समापन पर बच्चों ने भारत में अमन-चैन, आपसी भाईचारे और समृद्धि की दुआएं कीं। ईद का चांद देखने के साथ उनकी इबादत मुकम्मल हुई।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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