✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
- शहर में नया शोरूम, लेकिन पिछले साल से विवादों में घिरा ब्रांड
- सिवान के राजेंद्र पथ में ज़ुडियो शोरूम का उद्घाटन
- मई-जून 2025 में देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए
- केरल में SIO ने “Blood on clothes” अभियान चलाया
- इज़रायल से कथित संबंध और क्वालिटी को लेकर सवाल
सिवान शहर के राजेंद्र पथ में लोकप्रिय फैशन ब्रांड ज़ुडियो (Zudio) का नया शोरूम खुल गया है। लेकिन इसके साथ ही यह ब्रांड एक बार फिर उन विवादों के कारण चर्चा में आ गया है, जो पिछले साल देशभर में देखने को मिले थे।
पिछले साल जून 2025 में केरल में स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (SIO) ने “Blood on clothes” जैसे नारों के साथ ज़ुडियो के बहिष्कार की अपील की थी। यह विरोध एक बड़े प्रोपेलेस्टाइन अभियान का हिस्सा था, जिसमें कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ज़ुडियो जैसे ब्रांड्स गाजा में चल रही घटनाओं के संदर्भ में अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन कर रहे हैं।

इसके अलावा, 28 मई 2025 को हैदराबाद के सिकंदराबाद स्थित ज़ुडियो आउटलेट के बाहर Indian People in Solidarity with Palestine (IPSP) द्वारा भी प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्ट्रीट थिएटर, पोस्टर और नारों के जरिए लोगों से इस ब्रांड का बहिष्कार करने की अपील की।
इसी तरह जून 2025 में दिल्ली, मुंबई, पटना, पुणे, चंडीगढ़, विशाखापट्टनम और रोहतक समेत कई शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। इन अभियानों में फिलिस्तीन समर्थक संगठनों ने भाग लेते हुए लोगों से अपील की कि वे ऐसे ब्रांड्स से दूरी बनाएं, जिन पर इज़रायल से जुड़े होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और टाटा समूह या ज़ुडियो की ओर से इस तरह के किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
वहीं, इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं। भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने इन बहिष्कार अभियानों का विरोध करते हुए टाटा समूह का समर्थन किया और इसे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।
इसके अलावा, ज़ुडियो को लेकर एक अलग बहस इसकी उत्पाद गुणवत्ता को लेकर भी चल रही है। सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने इसे “यूज़ एंड थ्रो” ब्रांड बताते हुए कम कीमत के साथ कम टिकाऊ कपड़ों की शिकायत की है। साथ ही, तेजी से विस्तार के कारण ब्रांड की विशिष्टता (exclusivity) में कमी आने की भी चर्चा है।
अब सिवान में खुले इस नए शोरूम के बाद यह देखना अहम होगा कि क्या इन राष्ट्रीय विवादों का असर स्थानीय बाजार पर पड़ता है, या लोग इसे केवल एक सस्ते फैशन विकल्प के रूप में अपनाते हैं।

