✍🏽परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
इस्लामी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान उल मुअज्जम की 14 और 15 तारीख के बीच की रात को मनाई जाने वाली शब-ए-बारात की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गुरुवार की रात मुस्लिम समुदाय इस रात को खुदा की इबादत में गुजारने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस अवसर पर कब्रिस्तान जाकर फातेहाखानी (कुरआन शरीफ की आयतें पढ़कर) पूर्वजों की मगफिरत की दुआ करने की परंपरा है। इस रात की विशेष फजीलत (महत्व) बताई गई है, जिसे गुनाहों से माफी और तक़दीर संवारने की रात माना जाता है। मस्जिदों को सजाने का कार्य शुरू हो चुका है, जबकि कब्रिस्तानों की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है।
हाफिज मोहम्मद शमीम ने शब-ए-बारात की खासियत बताते हुए कहा कि इस रात अल्लाह तआला अपने बंदों के तमाम गुनाहों को माफ फरमाते हैं और एक साल की तक़दीर का लेखा-जोखा तैयार किया जाता है। हदीस शरीफ में भी इस रात की खास अहमियत का जिक्र किया गया है, जिसमें नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि शाबान की 15वीं रात इबादत में गुजारने और अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगने की रात है।
मस्जिदों और कब्रिस्तानों में तैयारियां पूरी
कई गांवों में पिछले कुछ दिनों से कब्रिस्तानों की सफाई का कार्य जारी था, जिसे बुधवार तक पूरा कर लिया गया। अब मस्जिदों को सजाने-संवारने का कार्य किया जा रहा है। कई स्थानों पर जलसा (धार्मिक आयोजन) भी आयोजित किए जाएंगे।
इन गांवों में कब्रिस्तान की सफाई पूरी:
मिस्करही, लालगंज, कैथवली, मोतीछापर, कविता, बभनौली, डोमडीह, बरासो, कोल्हुआ दरगाह, इंग्लिश, पतौआ, खैरा, बड़गांव, बैकुंठपुर, शीतलपुरा, लंगड़पुरा समेत कई अन्य स्थानों पर कब्रिस्तान को साफ कर रोशनी की व्यवस्था की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि शब-ए-बारात की रात मस्जिदों और कब्रिस्तानों को रोशनी से जगमग किया जाएगा।

