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March 18, 2026 1:40 am

सिवान : नौ दिवसीय रामकथा का हुआ समापन, अंतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन

✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ

वीएमएचई इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, राजन महाराज ने सुनाए रामायण के विभिन्न प्रसंग

  • वीएमएचई इंटर कॉलेज परिसर में नौ दिवसीय रामकथा का समापन
  • अंतिम दिन हनुमान द्वारा लंका दहन और रावण वध का वर्णन
  • कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन, श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
  • भरत मिलाप और शबरी प्रसंग के माध्यम से भक्ति और पारिवारिक प्रेम का संदेश

सिवान : नगर के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा का सोमवार दोपहर समापन हो गया। कथा का वाचन अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज द्वारा सुबह नौ बजे से किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, खासकर महिला श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली।
कथा के अंतिम दिन राजन महाराज ने भगवान श्रीराम की कथा के महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने हनुमान जी द्वारा लंका दहन, रावण संहार तथा भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान भक्तगण हनुमान जी की लीलाओं को सुनकर कभी आनंदित हुए तो कभी भावुक हो उठे।
कथा के समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इससे पूर्व कथा के आठवें दिन रविवार की संध्या अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज ने भरत मिलाप और शबरी प्रसंग का वर्णन करते हुए पारिवारिक स्नेह और निर्मल भक्ति की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में भाई अक्सर संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद करते हैं, लेकिन यदि भाई संपत्ति के बजाय विपत्ति का बंटवारा करें तो परिवार में प्रेम और स्नेह की धारा बहने लगेगी और परिवार सुख, शांति व समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।
राजन महाराज ने चित्रकूट में हुए भरत मिलाप के प्रसंग को प्रेम, आदर, त्याग, बलिदान, सत्य और न्याय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी-कभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं, फिर भी मनुष्य को अपना कर्तव्य निभाते हुए भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए। प्रभु श्रीराम के नाम का स्मरण करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन सार्थक बन जाता है।
शबरी प्रसंग के संदर्भ में उन्होंने “जब एही रहिया प्रभु जी के आवन होई” भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि शबरी की नवधा भक्ति भगवान राम के प्रति उनकी अनन्य श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।
रविवार को रेनुआ स्थित मंदिर और भरौली मठ में राजन जी महाराज द्वारा पंच पल्लव के पौधों का रोपण भी किया गया तथा उनके संरक्षण और सेवा का संकल्प दिलाया गया। भरौली मठ में महंत स्वामी रामनारायण दास जी महाराज ने उनका स्वागत किया। कथा के समापन अवसर पर आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का अभिनंदन भी किया गया।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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