✍🏽परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
सिवान: एक ओर जहां सरकार स्वच्छता को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर सिवान मुख्यालय जैसे भीड़भाड़ वाले शहर में महिलाओं के लिए मूलभूत सुविधा—महिला प्रसाधन केंद्र—का अभाव गंभीर चिंता का विषय बन गया है। नगर परिषद क्षेत्र में महिला चेयरमैन और उप मुख्य पार्षद महिला होते हुए भी अब तक शहर में एक भी महिला शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है।
मुख्यालय क्षेत्र में जिले के सभी प्रमुख सरकारी कार्यालय स्थित हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन हजारों की संख्या में महिलाएं अपने निजी कार्यों, इलाज, खरीदारी व अन्य जरूरतों के लिए शहर पहुंचती हैं। लेकिन प्रसाधन केंद्र की अनुपलब्धता के कारण उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
तेलहट्टा, सोनारटोली, गल्ला मंडी, थाना रोड, शांति वट जैसे प्रमुख बाजारों में महिला शौचालय की व्यवस्था न होने से महिलाओं को खासकर खरीदारी के समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कुछ स्थानों पर बने सार्वजनिक शौचालय इतने गंदे होते हैं कि महिलाएं वहां जाने से कतराती हैं, जिससे मजबूरी में कई महिलाएं खुले में शौच करने पर विवश हो जाती हैं।
यह विडंबना है कि नगर परिषद में कई महिला पार्षद होने के बावजूद इस मुद्दे पर अब तक कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया है और न ही किसी जनप्रतिनिधि द्वारा इसे लेकर आवाज बुलंद की गई है।
इस विषय पर नगर परिषद की सभापति सेंपी गुप्ता ने कहा, “बैठक में इस मुद्दे को रखा जाएगा और जहां व्यवस्था बनेगी, उस स्थान पर महिला शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।”
फिलहाल, शहर की महिलाओं को इस बुनियादी सुविधा के लिए आवाज़ उठाने की जरूरत है, ताकि यह मुद्दा सिर्फ बैठकों में ही न रह जाए, बल्कि ज़मीन पर भी इसका समाधान दिखाई दे।

