✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत, घाटों पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब
- खरना के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का निर्जला व्रत
- मंगलवार शाम 5:17 से 5:32 बजे तक अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य
- बुधवार सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ होगा समापन
- शहर से गांव तक श्रद्धा और भक्ति का माहौल
सिवान : लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ के दूसरे दिन सोमवार को व्रतियों ने पूरे दिन उपवास के बाद श्रद्धा और निष्ठा के साथ खरना अनुष्ठान संपन्न किया। नहाय-खाय के साथ रविवार से शुरू हुए इस पर्व में अब व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रख रहे हैं।
मंगलवार को छठ व्रत धारण करने वाले महिला और पुरुष व्रती विभिन्न घाटों पर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगे। इसके बाद बुधवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का विधिवत समापन होगा।
खरना को लेकर सुबह से ही घरों में तैयारियां शुरू हो गई थीं। दोपहर बाद शहर से लेकर गांव तक व्रतियों ने पारंपरिक तरीके से खरना का अनुष्ठान किया। व्रतियों ने खीर, रसियाव और रोटी का प्रसाद तैयार किया। वहीं कई स्थानों पर सेंधा नमक से बने चावल और चने की दाल का भी प्रसाद बनाया गया।
देर शाम व्रतियों ने विधि-विधान के साथ भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना की और खरना का प्रसाद ग्रहण कर उपवास तोड़ा। व्रतियों के प्रसाद ग्रहण करने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने भी प्रसाद ग्रहण किया।
आचार्य पंडित उमाशंकर पांडेय के अनुसार मंगलवार को श्रद्धालु शाम 5 बजकर 17 मिनट से 5 बजकर 32 मिनट के बीच अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। वहीं बुधवार को प्रातः 5 बजकर 45 मिनट के बाद उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रती अपना व्रत संपन्न करेंगे।

