✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
रंगों में सराबोर हुए शहर और गांव, प्रशासन रहा पूरी तरह अलर्ट
सिवान: जिले में बुधवार को होली का उत्साह चरम पर रहा। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी रंगों का उल्लास देखने को मिला। हर तरफ खुशियों की बौछार थी। चहुंओर अबीर-गुलाल उड़ रहे थे, ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दे रही थी और लोग रंगों में सराबोर होकर इस पावन पर्व का आनंद लेते नजर आए।
होली के अवसर पर सुरक्षा को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो और लोग शांतिपूर्वक त्योहार मना सकें। बुधवार की अल सुबह से ही जिले में होली की धूम शुरू हो गई थी। लोगों ने सबसे पहले मंदिरों और देवालयों में जाकर रंग अर्पित किया, इसके बाद घरों में परिवार के साथ होली खेलनी शुरू की।
बच्चे सुबह से ही पिचकारी और रंग लेकर घरों से निकल पड़े। कोई गुलाल उड़ाता नजर आया तो कोई रंगों से सराबोर दिखा। लोगों ने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाया और गले मिलकर होली की शुभकामनाएं दीं। वहीं युवाओं की टोलियां गांव और मोहल्लों में घूम-घूमकर लोगों को रंग लगाती रहीं और उत्सव का माहौल बनाती रहीं।
सड़कों पर होली गीतों की धुन पर युवा थिरकते नजर आए। लोगों ने अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवार के साथ मिलकर होली का त्योहार मनाया। गांवों में पारंपरिक होली गीतों की गूंज सुनाई देती रही। आधुनिकता के इस दौर में भले ही फाग गीतों की संख्या कम हो गई हो, लेकिन पारंपरिक संस्कृति की झलक आज भी कायम है। ढोलक की थाप और झाल-मजीरा की धुन पर “होली खेले रघुवीरा अवध में”, “बाबू कुंवर सिंह तेगवा बहादुर” और “अंगना में उड़े ला अबीर” जैसे गीतों से माहौल रंगीन हो उठा।
शाम को गले मिलकर दी बधाई
पूरे दिन रंगों में सराबोर रहने के बाद शाम को लोग नहा-धोकर नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे के घर पहुंचे और होली की बधाई दी। मिठाइयों का आदान-प्रदान हुआ और सभी ने मिलकर खुशियां बांटी।
शहर से लेकर गांव तक हर तरफ प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का रंग देखने को मिला। लोगों ने जात-पात, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर एक-दूसरे को गले लगाया और रिश्तों में नई मिठास घोली। कुल मिलाकर इस वर्ष होली का पर्व जिले में पूरे उत्साह, उमंग और पारंपरिक रंगों के साथ मनाया गया।