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March 31, 2026 6:27 pm

सिवान : उर्दू के विकास और उन्नयन के लिए गांव-गांव तक चलाना होगा जागरूकता अभियान

  • ✍🏽 परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ

सिवान: शहर के एक होटल में रविवार को कौमी असात्ज़ा तंजीम के तत्वाधान में ‘तहरीक तहफ़्फ़ुज़ उर्दू ज़बान व अदब’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना साकिब रजा जौहर मिस्बाही ने की, जबकि सरपरस्ती समाजसेवी जमशेद अली अलीग ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई, जिसके बाद मौलाना नौशाद मिस्बाही ने नातिया कलाम पेश किया और कारी समीउल्लाह ने उर्दू जबान के महत्व पर अपने अशआर प्रस्तुत किए। मंच संचालन कौमी असात्ज़ा तंजीम के जिला सचिव हाफिज शाह आजम आफाकी ने किया।

इस कार्यक्रम में आल मदरसा युवा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना इमरान भी उपस्थित रहे। उन्होंने उर्दू की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि उर्दू जबान को घर-घर तक पहुंचाने की मुहिम चलाई जाए। उन्होंने उर्दू भाषा की हिफाजत को सामूहिक जिम्मेदारी बताया और इसके प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।

समाजसेवी जमशेद अली अलीग ने नई पीढ़ी को उर्दू सिखाने और इसके महत्व को समझाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उर्दू के विकास और उन्नयन के लिए गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।

बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के सचिव एवं सेकेंडरी एजुकेशन के डिप्टी डायरेक्टर अब्दुस्सलाम अंसारी ने उर्दू के प्रचार-प्रसार को शिक्षकों की जिम्मेदारी बताया और इसके लिए गांव-गांव में मुहिम चलाने की जरूरत पर बल दिया।

बीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष इम्तियाज़ करीमी ने कहा कि अरबी, फारसी और उर्दू जबान को आगे बढ़ाने के लिए इसे सीखना आवश्यक है। उन्होंने अतीत को याद करते हुए बताया कि एक समय था जब उर्दू भाषा के प्रचार के लिए गांव-गांव जाया जाता था, लेकिन आज इसकी हिफाजत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

कौमी असात्ज़ा तंजीम के प्रदेश संयोजक रफी साहब ने उर्दू को परंपरा का अहम हिस्सा बताया, जबकि बिहार विधान परिषद के सदस्य अफाक अहमद ने नई नस्लों में उर्दू भाषा की शेरनी और मिठास घोलने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस कार्यक्रम में तंजीम के प्रदेश सचिव मो. ताजुद्दीन सहित कई बुद्धिजीवी, समाजसेवी और शिक्षाविद मौजूद रहे।

 

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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