✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
नम्मू–नसीम के नाम पर सजेगा राज्य स्तरीय फुटबॉल टूर्नामेंट, 3 बजे से होगा मुकाबलों का आगाज़
- आज दोपहर 3:00 बजे से मैच की शुरुआत
पूरे सिवान में आयोजन को लेकर खास तैयारी और उत्साह - 05 अप्रैल को खेला जाएगा फाइनल मुकाबला
विजेता को ₹51,000, उपविजेता को ₹31,000 पुरस्कार
सिवान की धरती एक बार फिर फुटबॉल के रोमांच और गौरवशाली इतिहास की साक्षी बनने जा रही है। आज यानी 30 मार्च से शुरू हो रहा “नम्मू–नसीम मेमोरियल राज्य स्तरीय फुटबॉल टूर्नामेंट 2026” न सिर्फ एक खेल आयोजन है, बल्कि यह सिवान की उस विरासत का उत्सव है, जिसने दशकों तक इस जिले को खेल के नक्शे पर अलग पहचान दिलाई। खास बात यह है कि आज पहले दिन के मुकाबले दोपहर 3:00 बजे से शुरू होंगे, जिसे लेकर जिलेभर में जबरदस्त उत्साह का माहौल है।

इस आयोजन को लेकर सिवान के शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक व्यापक चर्चा हो रही है। खेल प्रेमियों के बीच एक अलग ही जोश देखने को मिल रहा है। युवाओं ने अपने-अपने स्तर पर टीमों का समर्थन करने की योजना बनाई है, तो वहीं कई गांवों में लोग समूह बनाकर राजेंद्र स्टेडियम पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। जगह-जगह पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं, जिससे यह साफ झलकता है कि यह टूर्नामेंट अब एक जनउत्सव का रूप ले चुका है।
राजेंद्र स्टेडियम में आयोजित इस प्रतियोगिता के लिए आयोजकों ने भी विशेष तैयारी की है। खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं, दर्शकों के बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजाम को लेकर खास ध्यान दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि पहले ही दिन स्टेडियम में भारी भीड़ उमड़ेगी और मुकाबलों का रोमांच चरम पर होगा।
प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला 05 अप्रैल को खेला जाएगा। विजेता टीम को ₹51,000 और उपविजेता टीम को ₹31,000 की आकर्षक पुरस्कार राशि दी जाएगी। इससे न केवल खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा भी काफी कड़ी रहने की संभावना है।

दरअसल, यह टूर्नामेंट सिवान की ऐतिहासिक फुटबॉल जोड़ी—नईमुल हक़ (नम्मू बाबू) और नसीमुल हक (नसीम बाबू)—की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। इन दोनों खिलाड़ियों ने अपने समय में फुटबॉल के मैदान पर जो छाप छोड़ी, वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। 1960 से 1985 के बीच का उनका खेल दौर सिवान के लिए स्वर्णिम काल माना जाता है, जब उनकी जोड़ी पूरे बिहार में प्रसिद्ध थी।
नसीमुल हक अपनी तेज रफ्तार, शानदार स्ट्राइक और खेल की गहरी समझ के लिए जाने जाते थे, जबकि नम्मू बाबू अपनी ताकतवर किक और आक्रामक खेल शैली के लिए मशहूर थे। जब यह जोड़ी मैदान पर उतरती थी, तो दर्शकों के बीच एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता था। यही वजह है कि आज भी “नम्मू–नसीम” नाम सिवान की पहचान के रूप में लिया जाता है।
इस टूर्नामेंट के माध्यम से आयोजक न सिर्फ इन महान खिलाड़ियों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी खेल के प्रति प्रेरित करने का प्रयास कर रहे हैं। बदलते दौर में जहां खेल के तरीके और साधन आधुनिक हो गए हैं, वहीं ऐसे आयोजन यह याद दिलाते हैं कि सिवान की मिट्टी में खेल प्रतिभा की समृद्ध परंपरा रही है।
आज जब पहला मैच दोपहर 3:00 बजे से शुरू होगा, तो मैदान में सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं उतरेंगे, बल्कि उनके साथ उतरेगी सिवान की गौरवशाली विरासत, जुनून और वह इतिहास, जिसने इस जिले को खेल के क्षेत्र में एक खास पहचान दिलाई।

