✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
20 साल बाद बड़ा सत्ता परिवर्तन, बिहार को मिला 24वां मुख्यमंत्री
पटना: बिहार की राजनीति में बुधवार को एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला, जब सम्राट चौधरी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। बिहार लोकभवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने उन्हें शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण के साथ ही बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बना है, जिसे राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
करीब दो दशकों के बाद बिहार की सत्ता संरचना में यह बड़ा परिवर्तन हुआ है। सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने हैं। उनके साथ जेडीयू कोटे से विजय चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव ने भी मंत्री पद की शपथ ली। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है, जिससे सरकार को और मजबूती मिलने की संभावना है।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बिहार लोकभवन में राजनीतिक हलचल और उत्साह साफ तौर पर देखा गया। सम्राट चौधरी जब समारोह स्थल पर पहुंचे तो उन्होंने हाथ जोड़कर सभी अतिथियों और समर्थकों का अभिवादन किया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहे और उन्होंने सम्राट चौधरी को शुभकामनाएं दीं। समारोह में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, गिरिराज सिंह और शिवराज सिंह चौहान सहित कई दिग्गज नेता शामिल हुए।
इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि आरजेडी के वरिष्ठ नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी की उपस्थिति ने इसे और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया। पूरे समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। लोकभवन के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
शपथ ग्रहण से पहले सम्राट चौधरी ने पटना के बेली रोड स्थित हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह सीधे लोकभवन पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले नीतीश कुमार से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। यह दृश्य राजनीतिक सौहार्द का प्रतीक माना गया।
समारोह के दौरान सम्राट चौधरी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा, नीली बंडी और केसरिया गमछा धारण किया था। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” से हुई, जिसमें एनडीए के सभी विधायक और एमएलसी मौजूद रहे। कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा की उपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी, जो राज्यसभा चुनाव के दौरान अनुपस्थित रहे थे।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर में हुआ था। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के एक प्रमुख राजनीतिक नेता रहे हैं, जो सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। उनकी माता पार्वती देवी भी तारापुर से विधायक रह चुकी हैं। इस प्रकार राजनीति उन्हें विरासत में मिली।
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1990 के दशक में की थी। वर्ष 1999 में वह राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने थे, हालांकि उम्र से जुड़े विवाद के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी पहचान और मजबूत हुई।
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने मुंगेर के तारापुर से जीत हासिल की और बाद में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया। धीरे-धीरे पार्टी के भीतर उनकी स्थिति मजबूत होती गई और अंततः उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया। भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
नई सरकार के गठन के साथ ही बिहार में विकास, सुशासन और प्रशासनिक सुधारों को लेकर नई उम्मीदें जुड़ गई हैं। जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य किस दिशा में आगे बढ़ता है और सरकार अपने वादों को किस हद तक पूरा कर पाती है।

