✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
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रमजान रहमत, मगफिरत और निजात का महीना
लकड़ी नबीगंज प्रखंड के हुस्सेपुर गांव स्थित तेगी जामा मस्जिद के खतीब व इमाम हाफिज अजहर आलम सिवानी ने रमजानुल मुबारक की फजीलत बयान करते हुए कहा कि रमजान केवल रोजा और नमाज का महीना नहीं है, बल्कि यह दया, आत्मचिंतन और जरूरतमंदों की मदद का विशेष अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह एक अनिवार्य दान है, जो उन मुसलमानों पर फर्ज होता है जिनकी संपत्ति निसाब की निर्धारित सीमा तक पहुंच जाती है। जकात साल के किसी भी समय अदा की जा सकती है, लेकिन रमजान के महीने में इसका सवाब अधिक माना गया है। जकात केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि समाज में संपत्ति के संतुलित वितरण और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का माध्यम भी है।
हाफिज अजहर आलम सिवानी ने कहा कि कयामत के दिन रोजेदारों के लिए रोजा और कुरान दोनों सिफारिश करेंगे। एक हदीस का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि रोजा अल्लाह से अर्ज करेगा कि उसने इस व्यक्ति को दिन में खाने-पीने और अन्य इच्छाओं से रोके रखा, इसलिए इसकी सिफारिश कबूल फरमाई जाए। उन्होंने कहा कि रोजा अल्लाह के लिए विशेष इबादत है, जिसका प्रतिफल अल्लाह स्वयं अपने बंदे को अता करेंगे और यह गुनाहों से निजात का जरिया बनता है।
उन्होंने बताया कि माह-ए-रमजान का पहला अशरा रहमत और बरकत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत का और तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का होता है। रोजेदार की दुआ अल्लाह के दरबार में रद्द नहीं होती। रमजान का महीना रहमत, खैर व बरकत से भरपूर है और हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस पाक महीने की कद्र करे और अधिक से अधिक इबादत व नेक कार्यों में हिस्सा ले।