✍🏽 परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
अकाउंटेंट की सतर्कता से बची रकम, जालसाज भागने में रहा कामयाब
मैरवा (सीवान): केनरा बैंक से ढाई लाख रुपये की धोखाधड़ी कर निकासी की कोशिश को बैंक के अकाउंटेंट ने सतर्कता दिखाते हुए विफल कर दिया। यह रकम एकाउंटपेयी चेक में छेड़छाड़ कर बियरर चेक में बदलकर निकासी की जा रही थी।
मामला तब सामने आया जब मैरवा बिचली बाजार के पूर्व वार्ड पार्षद सह नगर पंचायत अभिकर्ता मनोज कुमार ने नगर पंचायत से प्राप्त ढाई लाख रुपये का चेक स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के ड्रॉप बॉक्स में 10 मार्च को जमा किया था। दो दिन बाद भी उनके खाते में राशि नहीं पहुंची तो उन्होंने बैंक में संपर्क किया, जहां रजिस्टर देखने के बाद बताया गया कि ऐसा कोई चेक प्राप्त नहीं हुआ है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
गुरुवार को केनरा बैंक में एक व्यक्ति चेक लेकर आया और खुद को मनोज कुमार (पिता रमेश चंद्र, सलेमपुर, मैरवा रोड) बताते हुए चेक के साथ आधार कार्ड की फोटो प्रति जमा की। राशि अधिक होने के कारण कैशियर ने उसे अकाउंटेंट के पास भेज दिया।
अकाउंटेंट ने सत्यापन के लिए नगर पंचायत से संपर्क किया, जहां से बताया गया कि चेक मैरवा के मनोज कुमार के नाम जारी हुआ था। जब अकाउंटेंट ने चेक को ध्यान से देखा तो उसमें छेड़छाड़ के निशान मिले। चेक के कोने में अकाउंटपेयी के लिए खींची गई दो रेखाएं मिटा दी गई थीं, जिससे जालसाज उसे बियरर चेक के रूप में पेश कर रहा था।
सवालों के घेरे में बैंकिंग सुरक्षा
जब धोखाधड़ी उजागर हुई तो जालसाज फरार हो गया। इसके बाद मनोज कुमार ने मैरवा थाना में आवेदन देकर जालसाजों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस घटना ने बैंकिंग सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर स्टेट बैंक के ड्रॉप बॉक्स में डाला गया चेक किसी और के हाथ कैसे लग गया? अगर केनरा बैंक ने ढाई लाख रुपये का भुगतान कर दिया होता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? यह पूरा मामला जांच का विषय है।