माहे रमजान में जहन्नुम के दरवाजे बंद और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं : मौलाना फैयाजुल कादरी
✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
रमजान रहमत, मगफिरत और निजात का महीना
दारौंदा प्रखंड के ख़मौरा गांव स्थित मदरसा दारुल उलूम गौसिया फैजाने रज़ा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौलाना फैयाजुल कादरी ने माहे रमजान की फजीलत बयान करते हुए कहा कि रमजानुल मुबारक तमाम महीनों का सरदार है। उन्होंने कहा कि हदीस शरीफ में हजरत अबू सईद खुदरी (र.अ.) से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि रमजान तमाम महीनों में सबसे अफज़ल और बरकत वाला महीना है।
मौलाना ने बताया कि माहे रमजान में जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। यह महीना अल्लाह तआला की खास रहमत, मगफिरत (क्षमा) और जहन्नम से निजात का जरिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि इस पवित्र महीने की अजमत का ख्याल रखें और ज्यादा से ज्यादा रोजा, तरावीह तथा नफली इबादतों में समय बिताएं।
उन्होंने आगे कहा कि रमजान की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इसी महीने में पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के जरिए अल्लाह की मुकद्दस किताब ‘कुरान शरीफ’ नाजिल हुई। यही वजह है कि मुसलमान इस महीने में नमाज और कुरान की तिलावत में विशेष रूप से मशगूल रहते हैं।
मौलाना फैयाजुल कादरी ने दान की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रमजान के पूरे महीने में सदका और जकात दी जा सकती है, लेकिन आखिरी दस दिनों में इसका सवाब अधिक होता है। उन्होंने कहा कि फितराना (जकात-अल-फितर) ईद की नमाज से पहले अदा करना चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोग भी खुशी के साथ ईद मना सकें।