✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ
DIG निलेश कुमार के नेतृत्व में छापेमारी, RJD विधायक पर गंभीर आरोप; भारी पुलिस बल के बीच कार्रवाई से मचा हड़कंप
- सुबह 8 बजे से ओसामा शहाब के घर और पैतृक आवास पर छापेमारी
- जमीन कब्जा और रंगदारी के आरोप में दर्ज FIR के बाद कार्रवाई
- अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद बढ़ी कानूनी दबाव
- DIG ने भू-माफियाओं को दिया सख्त संदेश, “कड़ी कार्रवाई होगी”
सीवान | जिले में सोमवार की सुबह उस वक्त राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई, जब सारण प्रक्षेत्र के DIG निलेश कुमार के नेतृत्व में दिवंगत पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे और रघुनाथपुर से राजद विधायक ओसामा शहाब के आवास पर छापेमारी की गई। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में SP पूरन कुमार झा सहित नगर और मुफस्सिल थाना की पुलिस टीम मौजूद रही।
छापेमारी के दौरान पूरे इलाके को पुलिस ने घेराबंदी कर सील जैसा कर दिया। आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
जमीन कब्जा और रंगदारी के आरोप से जुड़ा मामला
यह पूरी कार्रवाई महादेवा ओपी थाना क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर मामले के तहत की गई है। आरोप है कि एक चिकित्सक दंपति की जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया गया, जिसमें रंगदारी, मारपीट, लूटपाट और तोड़फोड़ जैसे गंभीर पहलू भी सामने आए हैं।

इस मामले में गोपालगंज जिले के मांझागढ़ थाना क्षेत्र निवासी डॉ. विनय कुमार सिंह की पत्नी डॉ. सुधा सिंह द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में ओसामा शहाब सहित 30-35 लोगों को नामजद और अज्ञात आरोपित बनाया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई साक्ष्य सामने आए हैं, जिनमें विधायक से जुड़े लोगों की संलिप्तता की पुष्टि होने की बात कही जा रही है। इसी आधार पर न्यायालय से अनुमति लेकर छापेमारी की कार्रवाई की गई।
कोर्ट से वारंट के बाद हुई कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह छापेमारी पूरी तरह न्यायालय की अनुमति के बाद की गई है। DIG निलेश कुमार ने बताया कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद सक्षम न्यायालय से वारंट प्राप्त किया गया और उसके बाद अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी गई।

छापेमारी दो प्रमुख स्थानों पर की गई—
पहला, शहर क्षेत्र स्थित नया आवास
दूसरा, प्रतापपुर स्थित पैतृक घर
दोनों जगहों पर पुलिस टीम ने गहन तलाशी ली और दस्तावेजों सहित अन्य संभावित साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया।
छापेमारी के दौरान क्या मिला, पुलिस ने नहीं किया खुलासा
हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ, इस पर पुलिस फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और बरामदगी या अन्य तथ्यों का खुलासा उचित समय पर किया जाएगा।
DIG ने कहा कि अभी किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करना जांच को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे मामले की वीडियोग्राफी कराई गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

ओसामा शहाब नहीं मिले घर पर
छापेमारी के दौरान सबसे अहम बात यह रही कि विधायक ओसामा शहाब अपने घर पर मौजूद नहीं मिले। पुलिस टीम ने पूरे घर की तलाशी ली, लेकिन उनकी मौजूदगी का कोई संकेत नहीं मिला।
इस पर DIG निलेश कुमार ने कहा,
“वे अभी नहीं मिले हैं। आगे की कानूनी कार्रवाई जल्द की जाएगी।”
इस बयान के बाद यह संकेत मिल रहा है कि पुलिस अब गिरफ्तारी की दिशा में भी आगे बढ़ सकती है।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज, बढ़ी मुश्किलें
इस पूरे घटनाक्रम से पहले 28 अप्रैल को सीवान कोर्ट ने ओसामा शहाब की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता नवेंदु शेखर दीपक ने अदालत में विधायक को निर्दोष बताते हुए जमानत की मांग की थी, लेकिन लोक अभियोजक ने इसका विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

इसके बाद से ही विधायक की कानूनी स्थिति कमजोर मानी जा रही थी और सोमवार की छापेमारी ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है।
16 अप्रैल से तेज हुई थी प्रशासनिक सख्ती
इस पूरे मामले की शुरुआत 16 अप्रैल को दर्ज प्राथमिकी के बाद हुई थी। उसी दिन DIG निलेश कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था और स्पष्ट निर्देश दिया था कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने को कहा था और यह भी स्पष्ट किया था कि कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
तब से ही यह मामला लगातार प्रशासनिक निगरानी में था और अब छापेमारी के रूप में इसकी बड़ी कार्रवाई सामने आई है।
क्या है पूरा विवाद?
पीड़ित पक्ष के अनुसार, उन्होंने 7 सितंबर 2024 को उक्त जमीन खरीदी थी और अंचल कार्यालय में उसका विधिवत रजिस्ट्रेशन और जमाबंदी भी दर्ज है।
करीब तीन महीने पहले उन्होंने जमीन पर चारदीवारी और एक कमरे का निर्माण कार्य शुरू कराया था। आरोप है कि इसी दौरान विधायक पक्ष की ओर से निर्माण कार्य रोकने का दबाव बनाया गया।
पीड़िता का कहना है कि पहले दस्तावेज देखने के बाद निर्माण की अनुमति देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में 14 अप्रैल को अचानक 30-40 लोगों के साथ हथियारबंद लोग पहुंचे और वहां काम कर रहे मजदूरों के साथ मारपीट की गई।
इसके साथ ही सीसी कैमरे तोड़ने, मोबाइल छीनने और निर्माण सामग्री लूटने का भी आरोप लगाया गया है।
DIG का सख्त संदेश: “भू-माफियाओं को नहीं बख्शा जाएगा”
छापेमारी के बाद मीडिया से बातचीत में DIG निलेश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे जिले के लिए एक संदेश है।
उन्होंने कहा:
“जो लोग जमीन कब्जा करने का प्रयास करते हैं, उन्हें सिवान पुलिस की ओर से सख्त संदेश है कि वे ऐसे कृत्य से बाज आएं। किसी भी गरीब या वास्तविक मालिक की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि भू-माफियाओं की सूची बनाना और सार्वजनिक करना जांच के हित में नहीं है, क्योंकि इससे साक्ष्यों के नष्ट होने की संभावना रहती है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पूरे इलाके की घेराबंदी
छापेमारी के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया था और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी तरह की भीड़ या विरोध की स्थिति न बने। साथ ही, कार्रवाई की पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
गली-मोहल्लों में पुलिस की मौजूदगी और वाहनों की आवाजाही से पूरा इलाका छावनी में तब्दील नजर आया।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस कार्रवाई के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ विपक्ष इसे कानून का राज स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई भी करार दे रहे हैं।
हालांकि, पुलिस और प्रशासन का साफ कहना है कि यह पूरी कार्रवाई साक्ष्यों और न्यायालय के आदेश के आधार पर की गई है और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होगी। चूंकि ओसामा शहाब छापेमारी के दौरान नहीं मिले, ऐसे में पुलिस की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर सबकी नजर है।
संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही गिरफ्तारी वारंट के आधार पर आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी। साथ ही, मामले में अन्य आरोपितों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष
सीवान में हुई यह छापेमारी सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संदेश मानी जा रही है। जमीन कब्जा और रंगदारी जैसे मामलों में प्रशासन की सख्ती साफ दिखाई दे रही है।
अब यह देखना अहम होगा कि जांच के अगले चरण में क्या खुलासे होते हैं और क्या वास्तव में आरोपितों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।


