✍🏽परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
दारौंदा प्रखंड मुख्यालय स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय परिसर में मंगलवार को आंगनबाड़ी सेविकाओं ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। बिहार प्रदेश आंगनबाड़ी संघ के तत्वावधान में हुए इस प्रदर्शन का नेतृत्व संघ की प्रखंड अध्यक्ष कुमारी मानती ने किया।
इस दौरान सेविकाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा पांडेय ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को संचालित करते हुए 50 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अब तक सेविकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला मात्र 4,500 रुपये मानदेय मौजूदा महंगाई के दौर में बेहद कम है।
सेविकाओं ने सीडीपीओ कार्यालय पर आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कहा कि लंबे समय से खराब मोबाइल बदले नहीं गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियों की वजह से वे बार-बार आंदोलन करने को मजबूर हो रही हैं।
संघ की ओर से सरकार से मांग की गई कि आंगनबाड़ी सेविकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, सेवानिवृत्ति के बाद सभी सुविधाएं दी जाएं, बाजार दर के अनुसार पोषाहार मिले और मानदेय में बढ़ोतरी की जाए।
इस धरना प्रदर्शन में सरोज देवी, नीता देवी, सुनीता कुमारी, सुगंधी देवी, रिनु देवी, रुखसाना खातून, नीलम देवी, पल्लवी देवी, सुनीता मिश्रा, कुमारी कंचन सहित बड़ी संख्या में सेविकाएं शामिल रहीं।
धरना के बाद सेविकाओं ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा और चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।