✍🏽 परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
दारौंदा प्रखंड मुख्यालय स्थित माध्यमिक विद्यालय (स्पर्श केंद्र) में शनिवार को ब्रेल लिपि के पितामह लुई ब्रेल का जन्म दिवस धूमधाम से मनाया गया।
इस मौके पर विद्यालय में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी जीवनी पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में गायन-वादन, म्यूजिकल चेयर, भाषण, ब्रेल लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया।
इस दौरान शिक्षकों ने लुई ब्रेल द्वारा दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि के आविष्कार पर प्रकाश डाला। शिक्षकों ने बताया कि बाल्यावस्था में लुई ब्रेल की सड़क दुर्घटना में दोनों आंखें चली गईं, लेकिन इसके बाद उन्होंने अपने दिमाग में वैज्ञानिक भावना को जागृत किया और 12 बिंदुओं को छह बिंदुओं में बदलकर नया कोड विकसित किया। इस कोड को आज हम ब्रेल लिपि के रूप में पहचानते हैं, जिसके माध्यम से दृष्टिबाधित बच्चे पढ़ने-लिखने में सक्षम होते हैं।
यह भी बताया गया कि दृष्टिबाधितों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान में ब्रेल लिपि का महत्वपूर्ण योगदान है, और यह लिपि शिक्षा, योग्य प्रशिक्षण और पुनर्वास में अहम भूमिका निभाती है। बच्चों द्वारा लुई ब्रेल की जीवनी को भाषण के माध्यम से बखूबी प्रदर्शित किया गया।