तरवारा:रमज़ान महीने की शुरुआत रहमत से होती है:मौलाना अहमद रज़ा अशर्फी जामई
✍️परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ
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तरवारा पंचायत के काजी टोला स्थित न्यू मस्जिद के खतिबो इमाम मौलाना अहमद रज़ा अशर्फी जामई,ने रमजानुल मुबारक पर फजीलत बयान करते हुए कहा कि रमज़ान के पवित्र महीने का चमकता हुआ सूरज उगता है, तो पूरी दुनियां में एक अजीब सी हालत फैल जाती है। यह महीना सिर्फ़ रोज़े का महीना नहीं है,बल्कि रूहों की बहार है।और इस बहार की सुगंध कुरान और अहले-लबैत (अ) की शिक्षाओं से निकलती है जो इस महीने की रहमत की बारिश में नाज़िल हुई।रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का नौवाँ और सबसे पवित्र महीनों में से एक है। रमज़ान का पवित्र महीना दुनियां भर के मुसलमानों द्वारा इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर कुरान के अवतरण की याद में उपवास के रूप में मनाया जाता है। मुसलमानों में उपवास का अनुष्ठान आत्मा को नकारात्मक और हानिकारक गतिविधियों से मुक्त करके शुद्ध करने के लिए हृदय को सांसारिक गतिविधियों से दूर करता है। रमज़ान आत्म-सुधार, आत्म-नियंत्रण,अनुशासन और सहानुभूति के लिए सबसे अच्छा अभ्यास है,जो कम भाग्यशाली लोगों के प्रति दान को प्रोत्साहित करता है।उन्होंने कहा कि रमज़ान के मुबारक महीने में मुसलमान को मिलने वाले सवाब विविध हैं और गुनाह करने की संभावना कम हो जाती है,क्योंकि रमज़ान के पवित्र महीने में इंसान और उसके रब के बीच कोई रुकावट नहीं रह सकती।इस पवित्र महीने की बरकतें अनगिनत हैं और इसे तीन चरणों में बांटा गया है, यानी अशरा (प्रत्येक में दस दिन)।अशरा अरबी शब्द है जिसका अर्थ है “दस”।उन्होंने कहा कि हमारे प्यारे पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया रमज़ान वह महीना है, जिसकी शुरुआत रहमत से, मध्य में माफ़ी से और अंत में जहन्नम की आग से मुक्ति से होती है।उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब को कुरान शरीफ की आयतें रमजान के महीने में नाजिल होनी शुरू हुई थी।इसके बाद 23 सालों में कुरान शरीफ का आसमान से दुनियां में उतरना मुकम्मल हुआ। इसी खास वजह से रमजान में कुरान शरीफ की तिलावत पर खास तवज्जो दी जाती है और मुसलमान ज्यादा से ज्यादा कुरान पढ़कर सवाब कमाते हैं। यानी पुण्य के भागी बनते हैं।