हुजूर साहब से अल्लाह ने कहा कि तुम अपने उम्मती को रोजा-नमाज के लिए पाबंद करो : मौलाना अहमद सर्फी
✍️परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ
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रमजान को फर्ज कर इंसान की रूहानी और जिस्मानी ताकतों को मजबूत करने का अवसर
सीवान। तरवारा पंचायत के काजी टोला गांव स्थित मदरसा काजी हसन अनवारूल उलूम के हेड मास्टर सह काजी जामा मस्जिद के खतीब व इमाम मौलाना अहमद सर्फी ने रमजानुल मुबारक की फजीलत बयान करते हुए कहा कि रमजान का दूसरा अशरा (11वें से 20वें रोजे तक) मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का दौर होता है। इस दौरान अल्लाह अपने रोजेदार बंदों को माफ करता है और अपनी रहमतों से नवाजता है।
उन्होंने कहा कि यह समय सब्र, इबादत और अल्लाह से अपने रिश्ते को मजबूत करने का बेहतरीन मौका है। दूसरे अशरे में सच्चे दिल से तौबा करने वाले बंदों की दुआएं कबूल होती हैं और अल्लाह अपने बंदों को माफी अता करता है।
मौलाना अहमद सर्फी ने तकरीर के दौरान कहा कि हुजूर साहब को अल्लाह तआला ने हुक्म दिया कि अपनी उम्मत को रोजा और नमाज के लिए पाबंद करें तथा बालिगों पर पांच वक्त की नमाज फर्ज करें। उन्होंने कहा कि नमाज इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और बुराइयों से रोकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि रोजा सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि अपने नफ्स पर काबू पाने, झूठ, गीबत और बुरे कामों से बचने का नाम है। रमजान का महीना इंसान को आत्मशुद्धि, अनुशासन और तकवा की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।
मौलाना ने कहा कि अल्लाह ने रमजान को फर्ज कर इंसान को अपनी रूहानी और जिस्मानी ताकतों को मजबूत करने का सुनहरा अवसर दिया है। रोजा इंसान में सब्र, शुक्र और इंसानियत की भावना को बढ़ाता है तथा समाज में भाईचारा कायम करता है।
उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि रमजान के मुकद्दस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें तथा आपसी भाईचारे और अमन-चैन को मजबूत बनाएं।

