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May 14, 2026 10:30 am

हसनपुरा : सीता परित्याग की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता

✒️ परवेज अख्तर / एडिटर इन चीफ

मार्मिक प्रसंग सुनकर पंडाल में छलके आंसू, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

  • उसरी शिव मंदिर परिसर में भव्य राम जन्मोत्सव समारोह जारी
  • प्रसिद्ध कथा वाचिका डॉ. लवी मैत्रेय ने सुनाई सीता परित्याग की कथा
  • श्रद्धालु श्रोता भावुक होकर रो पड़े, माहौल हुआ भक्तिमय
  • आरती और प्रसाद वितरण के साथ दूसरे दिन की कथा का समापन

हसनपुरा : चैत्र नवरात्र एवं हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर हसनपुरा नगर पंचायत के उसरी शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम जन्मोत्सव समारोह के अंतर्गत श्रीरामचरितमानस नवाह परायण महायज्ञ और संगीतमय श्रीमद बाल्मीकि रामायण कथा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी है। इस दौरान यज्ञ मंडप की परिक्रमा और कथा श्रवण के लिए श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार संध्या को व्यासपीठ पर विराजित श्रीधाम वृंदावन से पधारी विश्व प्रसिद्ध श्रीराम कथा वाचिका डॉ. लवी मैत्रेय दीदी ने रामायण के उत्तरकांड में वर्णित सीता परित्याग की मार्मिक कथा सुनाई। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि लंका विजय के बाद जब माता सीता अयोध्या लौटीं, तब कुछ लोगों के मन में उनके चरित्र को लेकर संदेह उत्पन्न हो गया था। विशेषकर एक धोबी द्वारा उठाए गए प्रश्न ने इस संदेह को और गहरा कर दिया।
डॉ. मैत्रेय ने कहा कि भगवान श्रीराम भली-भांति जानते थे कि माता सीता पूर्णतः पवित्र और निर्दोष हैं, लेकिन एक आदर्श राजा के रूप में उन्होंने अपने व्यक्तिगत सुख से ऊपर उठकर प्रजा की भावना और राजधर्म को प्राथमिकता दी। इसी कारण उन्होंने अत्यंत भारी मन से सीता जी को वनवास भेजने का कठिन निर्णय लिया।


उन्होंने उस हृदयविदारक प्रसंग का भी वर्णन किया, जब लक्ष्मण जी गर्भवती माता सीता को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम के समीप छोड़कर लौट आए। इस दृश्य का वर्णन सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे और कई लोगों की आंखों से आंसू बहने लगे।
कथा वाचिका ने आगे कहा कि यह प्रसंग न केवल त्याग और धर्म की पराकाष्ठा को दर्शाता है, बल्कि माता सीता के अद्भुत साहस और धैर्य का भी प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस कठिन समय में भी माता सीता ने अटूट साहस का परिचय दिया और परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए अपने जीवन का नया अध्याय शुरू किया।
सीता निर्वासन की इस भावुक कथा ने पूरे पंडाल को भक्ति और भावनाओं से सराबोर कर दिया। विशेषकर माताएं और बहनें भावुक होकर रो पड़ीं, वहीं अन्य श्रद्धालु भी सिसकते नजर आए।
कथा के समापन पर विधिवत आरती और प्रसाद वितरण किया गया, जिसके बाद दूसरे दिन की कथा को विराम दिया गया।
इस अवसर पर समिति के संयोजक पुरुषोत्तम दास जी महाराज, हलचल दास जी महाराज, आचार्य विजय मिश्रा, यज्ञाचार्य पंडित राजू मिश्रा, मुख्य यजमान कृष्णा जी प्रसाद व श्रीमती नीतू देवी, विकास तिवारी व श्रीमती नेहा देवी सहित हियुवा और रामनवमी सेवा समिति के कई सदस्य उपस्थित रहे। साथ ही सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भक्त और श्रोता कार्यक्रम में शामिल हुए।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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