✍🏽परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
सीमावर्ती जिले में शराबबंदी लागू कराने में उत्पाद विभाग की कमजोरी आई सामने
शराबबंदी को प्रभावी ढंग से लागू कराने वाले उत्पाद विभाग की हालत इस समय सीवान जिले में बेहद जर्जर है। विभाग को न तो पर्याप्त संसाधन मिल रहे हैं और न ही स्वीकृत पदों पर अधिकारी और जवान तैनात हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति उत्पाद अधीक्षक के पद को लेकर है, जो करीब आठ माह से खाली है। वर्तमान में एक इंस्पेक्टर को इसका प्रभार सौंपा गया है और उनके सहयोग के लिए एक अन्य इंस्पेक्टर को भी जिम्मेदारी दी गई है।
इस अधीक्षक पद के खाली रहने और सीमित संसाधनों के कारण शराब तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, जबकि सीवान जिला उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है, जिससे यहां अवैध शराब की आपूर्ति की संभावना अधिक बनी रहती है।
हालांकि विभाग द्वारा समय-समय पर छापेमारी कर तस्करों की गिरफ्तारी और शराब की जब्ती की जाती है, लेकिन ये प्रयास सीमित संसाधनों के कारण व्यापक प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं।
प्रतिबंध के बावजूद शराब की बिक्री जारी
शराबबंदी के बावजूद जिले के कई क्षेत्रों में चोरी-छिपे शराब की बिक्री बदस्तूर जारी है। तस्कर यूपी सहित अन्य राज्यों से शराब मंगाकर स्थानीय स्तर पर बेच रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में महुआ से बनी देशी शराब भी तैयार कर बेची जा रही है।
इसका प्रमाण प्रतिदिन सामने आने वाली घटनाओं से मिलता है, जिनमें विभिन्न थानों की पुलिस शराब बरामद करती है और तस्करों को गिरफ्तार करती है। उत्पाद पुलिस रोजाना कार्रवाई का दावा तो करती है, लेकिन बिना स्थायी अधीक्षक और आवश्यक संसाधनों के ऐसे प्रयास लंबे समय तक असरदार साबित नहीं हो पा रहे।