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March 3, 2026 9:32 pm

सिसवन: राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जागरूकता और उपचार कार्यों में तेजी

✍🏽 परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत भारत को टीबी मुक्त करने के अभियान में विभागीय अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सिसवन प्रखंड में कई स्तरों पर सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में सिसवन पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एस एम समउद्दीन आजाद ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुरूप देश को टीबी से मुक्त करने के लिए विभाग पूरी संजीदगी से जुटा है। इसके लिए निश्चय पोर्टल पर रोगियों का डेटा अपलोड किया जा रहा है, ताकि योजनाबद्ध तरीके से उपचार किया जा सके। मरीजों को मुफ्त परामर्श, जांच और दवा के साथ-साथ सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

डॉ. आजाद ने बताया कि प्रत्येक माह की 16 तारीख को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) में निश्चय मेला आयोजित होता है, जिसमें ट्रूनैट और माइक्रोस्कोपिक जांच के जरिए संभावित मरीजों की जांच की जाती है। टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल इलाज शुरू किया जाता है।

सिसवन पीएचसी के वरीय यक्ष्मा पर्यवेक्षक (एसटीएस) राधेश्याम प्रसाद ने बताया कि जनवरी से दिसंबर 2024 तक कुल 148 रोगियों की पहचान हुई थी, जो अब पूर्णतः स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं, जनवरी से मार्च 2025 के बीच 38 नए मरीजों की पहचान की गई है। इनमें जनवरी में 13, फरवरी में 13 और मार्च में 12 मरीज शामिल हैं, जिनका इलाज जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत प्रत्येक मरीज को ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जाती है और निक्षय मित्रों द्वारा छह महीने तक पौष्टिक फूड पैकेट भी वितरित किए जाते हैं। वर्तमान में चार मरीजों को स्थानीय स्तर पर गोद लिया गया है, जिन्हें हर माह फूड बास्केट प्रदान की जा रही है।

जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने जानकारी दी कि जिलाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता के निर्देश और सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद के मार्गदर्शन में सभी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम, एसटीएस, एसटीएलएस और सीएचओ मिलकर जिम्मेदारीपूर्वक कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीबी का उपचार लंबा होता है और बीच में दवा छोड़ना खतरनाक हो सकता है, इसलिए मरीजों को लगातार जागरूक करना और उनका मनोबल बनाए रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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