✍🏽 परवेज़ अख़्तर/एडिटर इन चीफ
सिवान: रंगों के त्योहार होली शुक्रवार को मनाई जाएगी। बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, लेकिन केमिकल युक्त रंगों के बढ़ते उपयोग से स्वास्थ्य को गंभीर खतरे भी उत्पन्न हो रहे हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. रबियुद्दीन का कहना है कि रासायनिक रंगों के संपर्क में आने से त्वचा झुलस सकती है, खुजली, जलन, दाने और नेत्र संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इतना ही नहीं, सांस के जरिए ये हानिकारक रंग फेफड़ों में भी संक्रमण फैला सकते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
घर पर बनाए प्राकृतिक रंग, सुरक्षित तरीके से खेलें होली
विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक और हर्बल रंगों का उपयोग सुरक्षित और त्वचा के अनुकूल होता है। घर में ही प्राकृतिक रंग तैयार कर सकते हैं—
- पीला रंग: चार चम्मच बेसन में दो चम्मच हल्दी मिलाकर बनाया जा सकता है।
- हरा रंग: मेहंदी और आंवले के पाउडर का मिश्रण उपयुक्त रहता है।
- काला रंग: आंवला चूर्ण को लोहे के बर्तन में रातभर भिगोने से तैयार किया जा सकता है।
- लाल रंग: पलाश के फूलों को पानी में उबालकर या सूखाकर बनाया जा सकता है।
केमिकल वाले रंगों से बचाव के उपाय
केमिकल युक्त रंगों से त्वचा और आंखों को बचाने के लिए होली से पहले कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं—
- होली खेलने से पहले नारियल तेल या सरसों का तेल पूरे शरीर पर लगाएं, जिससे रंग त्वचा पर अधिक न चिपके।
- ढीले और फुल-स्लीव वाले कपड़े पहनें, जिससे शरीर का अधिकतर भाग ढका रहे।
- अगर किसी ने केमिकल युक्त रंग लगा दिया और जलन या खुजली हो रही है, तो तुरंत प्रभावित हिस्से को ठंडे पानी से धोएं और आवश्यक हो तो चिकित्सक से परामर्श लें।
हर्बल रंगों से होली खेलने से न सिर्फ हमारा स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल रहेगा। इस होली को प्राकृतिक रंगों के साथ सुरक्षित और खुशहाल बनाएं।