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April 21, 2026 7:26 am

मैरवा: माहे रमजान में अर्श से फर्श तक लगातार होती है रहमतों की बारिश: कारी हसन रज़ा सिवानी

रमजान इबादत,बरकत और गुनाहों की माफी का मुकद्दस महीना
✍️ परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ
संपर्क सूत्र(7004199400)

मैरवा प्रखंड के बरासों गांव स्थित मस्जिद के खतीबो इमाम,शायरे अहले सुन्नत कारी हसन रज़ा सिवानी ने रमजानुल मुबारक की फजीलत बयान करते हुए कहा कि माह-ए-रमजान इबादत, बरकत और अपनों के साथ खुशियां बांटने का पवित्र महीना है। उन्होंने कहा कि जैसे ही आसमान में रमजान का चांद नजर आता है, वैसे ही हर तरफ रौनक और इबादत का माहौल कायम हो जाता है।
कारी हसन रज़ा सिवानी ने कहा कि रमजान का पाक महीना अल्लाह की रहमतों, बरकतों और मगफिरत (माफी) का समय है, जिसे “अर्श से फर्श तक रहमतों की बारिश” के रूप में जाना जाता है। इस दौरान इबादत करने वालों के रिज़्क़ में बरकत होती है और सही अरकान के साथ रोज़ा रखने पर गुनाह माफ कर दिए जाते हैं, जिससे इंसान को रूहानी सुकून हासिल होता है।
उन्होंने बताया कि रमजान के अंत में ईद-उल-फितर की नमाज से पहले हर साहिबे-निसाब मुसलमान पर ज़कात-उल-फितर अदा करना अनिवार्य है। यह एक फर्ज़ दान है, जिसमें परंपरागत रूप से मुख्य खाद्य सामग्री या उसकी कीमत अदा की जाती है, ताकि जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि रमजान की आखिरी दस रातें विशेष महत्व रखती हैं। इन्हीं में से एक रात लैलतुल क़द्र (शबे क़द्र) होती है, जिसे हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। इस रात इबादत और दान-पुण्य का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
कारी हसन रज़ा शिवानी ने मुसलमानों से अपील की कि इस पवित्र महीने में कुरआन की तिलावत, तरावीह की नमाज, तहज्जुद और अल्लाह का ज्यादा से ज्यादा जिक्र करें। उन्होंने कहा कि रमजान आत्मशुद्धि, आत्ममंथन और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगकर उसके करीब आने का बेहतरीन अवसर है।

Samay Siwan
Author: Samay Siwan

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